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Sunday, November 1, 2020

विज्ञान के शोध से समन्वय कर छोटी औद्योगिक इकाइयों का विस्तार किया जाएगा-मंत्री सखलेचा

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आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लिए विज्ञान-प्रौद्योगिकी और एमएसएमई की कॉन्फ्रेंस सम्पन्न
मध्यप्रदेश को देश का रोल मॉडल बनाने का प्रयास  


मध्यप्रदेश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के रिसर्च और विकास को सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम से जोड़कर छोटी इकाइयों का विस्तार किया जाएगा, जो देश के लिए भी मॉडल के रूप में प्रेरणा देगा। यह बात सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम एवं विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने रविवार को सम्पन्न राउंड टेबिल कॉन्फ़्रेंस के दौरान कही।

प्रदेश के विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों की भूमिका-आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के भावी रोडमेप विषय पर पलाश रेसीडेन्सी में सम्पन्न राउंड टेबल कॉन्फ़्रेंस में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत सहस्त्रबुद्धे, एमएसएमई विभाग के सचिव विवेक पोरवाल, साइंस टेक्नालॉजी काउंसिल मध्यप्रदेश के डी.जी. अनिल कोठारी सहित विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे। मंत्री सखलेचा ने कहा कि कोविड-19 के कारण बाजार, उपभोक्ता, तकनीकी, विज्ञान आदि के व्यवहार में बदलाव अब दशकों तक रहेगा। उद्योगों की प्राथमिकता बदली है और सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि चीन के उत्पादों का चलन पूरी दुनिया मे कम हुआ है और यही अवसर है जो हमे प्रधानमंत्री के संकल्प के साथ आत्मनिर्भर बनने का संदेश देता है। सखलेचा ने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य भी यही है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के समन्वय से नव उद्यमियों और नवीन इकाइयों के लिए हम पूरी तैयारी के साथ अभिभावक बनकर आगे आयें।

मंत्री सखलेचा ने कहा कि उन्होंने राज्य शासन से आग्रह किया है कि सीएसआर मद की राशि का कुछ हिस्सा विज्ञान, प्रौद्योगिकी के रिसर्च और विकास पर खर्च हो। उन्होंने कहा कि अब तकनीक बड़ी तेजी से बदल रही है और ऐसे में दुनिया से प्रतियोगिता शोध और विकास के माध्यम से ही की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में टेलेंट की कमी नहीं है, जरूरत है नए उद्यमियों को सही राह दिखाने की। सखलेचा ने कहा कि उम्मीद है कि आगामी 6-8 माह में हम इस दिशा में सुनियोजित नीति अपनाकर चीन के उत्पादों के रिक्त स्थान को मध्यप्रदेश के उत्पादों से भरेंगे। उन्होंने कहा कि इकाइयों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हमें एक योजना पर काम करना होगा।

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विचारों के अनुरूप देश में विकास के नए द्वार खोलने की अपेक्षा के साथ विज्ञान भारती उद्योगों के साथ समन्वय की भूमिका में है। उन्होंने कहा कि इस समन्वय से मध्यप्रदेश से देश को काफी योगदान मिलेगा। एमएसएमई विभाग के सचिव पोरवाल ने कहा कि कोविड के कारण दुनिया में अनेक स्थायी और अस्थायी बदलाव हुए है, हम नई चुनौतियों को अवसर में बदलने के लिए तैयार हैं। अनिल कोठारी ने कॉन्फ्रेंस की रूपरेखा से अवगत कराया। इस दौरान प्रेजेन्टेशन के माध्यम से दोनों सेक्टर से भी अवगत कराया गया। कॉन्फ़्रेंस के दूसरे सत्र में प्रतिभागियों और संस्थाओं के द्वारा प्रस्तुत बिन्दुओं पर विभागों द्वारा विचार-विमर्श किया गया। विभागों ने सुझावों के आधार पर नई योजना पर काम करने पर सहमति व्यक्त की।



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