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Saturday, December 19, 2020

रायसेन/सिलवानी, अज्ञानता एवं अदूरदर्शिता में लिया गया निर्णय घातक सिद्ध होता है - पंडित राकेश महाराज।

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अज्ञानता एवं अदूरदर्शिता में लिया गया निर्णय घातक सिद्ध होता है - पंडित राकेश महाराज।

भोडि़या गांव में किया जा रहा है सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन।

रायसेन/सिलवानी, अज्ञानता एवं अदूरदर्शिता में लिया गया निर्णय घातक सिद्ध होता है - पंडित राकेश महाराज।

घातक रिपोर्टर, जसवंत साहू, रायसेन/सिलवानी।
सिलवानी। तहसील के भोडि़या गावं में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को मथुरा से आए पंडित राकेश महाराज ने श्रद्धालु जनों को संबोधित करते हुए कहा कि अज्ञानता और अदूरदर्शिता में जो निर्णय लिया जाता है वह दुखदाई होता है। इसलिए व्यक्ति को चाहिए कि पूर्ण ज्ञान करके एवं दूरदर्शिता पूर्ण निर्णय लेकर ही कार्य को संपन्न करना चाहिएए और बिना विचारे जो भी कार्य किया जाता है उसमें पछतावा के अलावा कुछ भी प्राप्त नहीं होता है। उन्होने कहा कि जब राजा परीक्षित ऋषि के आश्रम में गए तो उन्होंने ऋषि को ध्यान मग्न अवस्था में देखाए जब ध्यान की अवस्था में ऋषि थे तो उनको यह ज्ञान नहीं था कि मेरे आश्रम में राजा का आगमन हुआ है। राजा को अहंकार जागृत हो गया किसी ने मेरा सम्मान नहीं किया और उनके मन में अज्ञानता वश यह इच्छा हुई कि मेरा कहीं ना कहीं अपमान हो गया है तो उन्होंने मृत सर्प को ऋषि के गले में डाल दिया और वहां से चले आए। उनके पुत्र ने जब भी अपने पिता का अपमान देखा तो उन्होंने राजा परीक्षित को श्राप दे दिया की सात दिन में दिन में तक्षक नाग के काटने से तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी।

रायसेन/सिलवानी, अज्ञानता एवं अदूरदर्शिता में लिया गया निर्णय घातक सिद्ध होता है - पंडित राकेश महाराज।

कथा वाचक ने बताया कि इसीलिए मनुष्य को चाहिए कि वह पूर्ण विवेक से विचार करके कोई भी शब्द या वाक्य अपने मुख से निकाले। भगवान के बनाए हुए संसार में कोई अपना नहीं है सभी कुछ परमात्मा का है इस बात का ध्यान रखना चाहिए। उन्होने बताया कि भगवान शुकदेव जी को बुलाकर राजा परीक्षित ने अपने आत्म कल्याण के लिए मार्ग पूछा तो सुखदेव ने बताया कि श्रीमद्भागवत की कथा श्रवण करने से तुम्हें मोक्ष प्राप्त होगा। श्रीमद्भागवत कथा मोक्षदायिनी है। इसलिए तुम सात दिन तक श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करके अपने आत्म कल्याण का प्रयास करो। जिससे कि तुम्हारा मोक्ष हो जाए। मात्र तुम्हारे पास सात दिन का समय ही है सात दिन में ही श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से तुम्हारे आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में श्रद्वालु पहुंव रहे है।

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