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Tuesday, February 10, 2026

सीहोर, फैक्ट्री प्रबंधन पर श्रमिक कानूनों के उल्लंघन के गंभीर आरोप, इंटक ने कलेक्टर व श्रम विभाग से की कार्रवाई की मांग

 फैक्ट्री प्रबंधन पर श्रमिक कानूनों के उल्लंघन के गंभीर आरोप, इंटक ने कलेक्टर व श्रम विभाग से की कार्रवाई की मांग

सीहोर, फैक्ट्री प्रबंधन पर श्रमिक कानूनों के उल्लंघन के गंभीर आरोप, इंटक ने कलेक्टर व श्रम विभाग से की कार्रवाई की मांग


घातक रिपोर्टर | भोपाल 

जिले की एक निजी फैक्ट्री में कार्यरत महिला एवं पुरुष ठेका कर्मचारियों के शोषण का मामला सामने आया है। म.प्र. ठेका श्रमिक मजदूर कांग्रेस (इंटक) ने इस संबंध में जिला कलेक्टर एवं श्रम विभाग को लिखित शिकायत सौंपते हुए फैक्ट्री प्रबंधन पर श्रम कानूनों के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।

इंटक के पदाधिकारी शुरेश श्रीवास्तव, व राधेश्याम  चिंतामन  द्वारा सौंपे गए पत्र में बताया गया है कि फैक्ट्री में कार्यरत कर्मचारियों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही कर्मचारियों के वेतन से ईएसआई और पीएफ की राशि काट तो ली जाती है, लेकिन उसे संबंधित विभागों में जमा नहीं किया जा रहा, जो कि कानूनन अपराध है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि श्रम निरीक्षक द्वारा निरीक्षण के दौरान कमियां पाए जाने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नियमों के अनुसार दिए जाने वाले  ईएल/सीएल  (EL/CL) अर्जित अवकाश का भी लाभ  श्रमिकों को नहीं मिल पा रहा, वहीं वर्ष 2024-25 का दीपावली बोनस आज दिनांक तक कर्मचारियों को नहीं दिया गया है।

महिला कर्मचारियों के संबंध में शिकायत और भी गंभीर है। पत्र में कहा गया है कि फैक्ट्री में महिला कर्मचारियों की संख्या अधिक होने के बावजूद उनके छोटे बच्चों के लिए क्रेच (शिशु गृह) की व्यवस्था नहीं की गई है, जो मातृत्व लाभ अधिनियम का खुला उल्लंघन है। इसके साथ ही कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

इंटक के जिला पदाधिकारियों ने मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर फैक्ट्री प्रबंधन के विरुद्ध श्रम कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए, बकाया वेतन, बोनस, ईएसआई-पीएफ की राशि कर्मचारियों को दिलाई जाए तथा दोषी अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय हो।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और श्रम विभाग इस गंभीर शिकायत पर कितनी शीघ्रता से कार्रवाई करता है, या फिर ठेका श्रमिकों का शोषण यूं ही जारी रहेगा।

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