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https://play.google.com/store/apps/details?id=ghatak.reporter.techsellविषम परिस्थियों मैं धैर्य रख अपने संकल्प में एक कदम और बढ़े नारायण साहू।
- सब्जी व्यापारी ने गरीब कन्या का विवाह कराकर दिया गृहस्थी का सामान।
- 51 कन्यों के विवाह कराने का संकल्प लेने वाले नारायण साहू इस साल अब तक करा चुके है 8 कन्यों का विवाह।
घातक रिपोर्टर, अरविंद सिंह जादौन, भोपाल। 9329393447
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कन्या को आशीर्वाद दे नारायण साहू व उनकी पत्नी
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मंडीदीप। सब्जी के थोक एवं खुदरा व्यापारी नारायण साहू ने 51 कन्याओं का कन्यादान करने का संकल्प लिया है पिछले दिनों नारायण साहू और एक अन्य व्यापारी का मार्केट में विवाद हो जाने के बाद नारायण साहू लगभग 20 से 25 दिन गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती रहे यह घटना भी नारायण साहू के समाजसेवी मनोबल के सामने घुटने टेकती नजर आई अगर व्यक्ति ने मन में समाज सेवा करने का ठान लिया है तो कोई भी परिस्थिति उसे रोक नहीं सकती इस बात के लिए यह यह एक सर्वश्रेस्ठ उदाहरण है। बीते दिनों हुए विवाद के बाद सब्जी व्यापारी नारायण साहू ने अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही 51 कन्याओं के कन्यादान के संकल्प में एक कदम और बढ़ा कर एक कन्यादान संतोषी माता मंदिर में पूरा कराया। आइये पढ़ते हैं क्या और क्यों करते है नारायण साहू ये समाज सेवी कार्य।
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कार्यक्रम मैं उपस्थित गनमनी नागरिक
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एक ओर जहां केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के नाम पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। वहीं दूसरी और शहर के सामाजिक कार्यकर्ता और पेशे से थोक सब्जी विक्रेता नारायण साहू गरीब परिवार की कन्यों के पूरा दान दहेज देकर बेटी का घर बसाओ नामक मुहिम चला रहे हैं। जिसके अंतर्गत वे अब तक 8 कन्यों का कन्यादान कर उनका दाम्पत्य जीवन बसा चुके हैं। जिसकी क्षेत्र में सर्वत्र सराहना हो रही है। इसी अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को शहर की ही एक परिवार की लड़की का सारा खर्च उठाते हुए उनके परिजनों को बड़ी राहत देने का काम किया। उन्होंने वार्ड 7 संतोषी माता मंदिर में पूरे विधि विधान से विवाह संपन्न कराया। शहर के वार्ड 10 में रहने वाली राजकुमार मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार की आजीविका चलातीं है। पुत्री वंदना का रिश्ता कन्नौर के सचिन चावरे से तय हुआ। लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिजनों के सामने समस्या खड़ी हो गई थी। जब इसकी जानकारी शहर के सामाजिक कार्यकर्ता नारायण साहू को मिली तो उन्होंने अपनी दैनिक कमाई में से एकत्रित किए गए लगभग एक लाख रुपये से ज्यादा की धनराशि से लड़की के विवाह में प्रयोग होने वाले न केवल सामान की व्यवस्था की बल्कि विवाह का सरा खर्चा भी उठाया। जिस पर परिजनों ने राहत की सांस ली। इस अवसर पर नगर के वारिस्थ पत्रकारों सहित नगर के राजनेतिक गणमान्य नागरिकों सहित सभी समाजों के वारिस्थ नागरिक, समाजसेवी उपस्थित रहे जिनका नारायण साहू ने साल श्रीफल देकर स्वागत किया कार्यक्रम में मुख्य रूप से पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष पूर्णिमा राजा जैन, विपिन भार्गव, बद्री सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र अग्रवाल, नरेंद्र मैथिल दीपेश मारण अरविंद जैन सहित अनेकों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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| कार्यक्रम मैं उपस्थित पुरनगर पालिका अधयक्ष पुर्णिमा राजा जैन |
माँ बीजासन के उपासक हैं नारायण:
45 वर्षीय नारायण माँ बीजासन के कि उन्होंने बीजासन मैया के आर्शीवाद से अपने जीवनकाल में इक्कावन गरीब, बेसहारा अनाथ बालिकाओं का घर बसाने का संकल्प लिया है इस संकल्प की पूर्ती के लिए वे अब तक 8 अनाथ बालिका का विवाह संपन्न करा चुके हैं। अनाथ गरीब या बेसहारा लोगों के प्रति सद्भावना की इस पहल नें नारायण को नगर में प्रशंसा का पात्र बना दिया है। नवविवाहिता वंदना की विधवा माँ राजकुमारी पारोचे नें बताया कि उनकी 2 बेटियां हैं और इन सबसे छोटा एक बेटा है वे बताती हैं कि वंदना के पिता नगर पालिका में दिहाडी मजदूरी करते थे जिनकी 4 महीने पहले काम के दौरान करंट लगने से मौत हो गई।अपनी बेटी के विवाह में मिली मदद से राजकुमारी बहुत खुश हैं और समाजसेवी नारायण साहू के प्रति बहुत आभार व्यक्त कर रही हैं।
हर दिन गुल्लक में डालते है पैसा:
नारायण बताते है कि उन्होंने जो संकल्प लिया है।उसकी पूर्ति के लिए वे प्रतिदिन गुल्लक में पैसे जमा करते है। इस तरह गुल्लक में जमा की राशि से वे अपना संकल्प पुरे करते है। वे बताते है कि इस तरह मदद करके मुझे आत्मीय खुशी मिलती है कि में इन बेसाहारा और अनाथ लोगो का सहारा बन पाया।उन्होंने बताया कि अगर इसी तरह की मदद सभी लोग करेंगे तो कोई भी आभावों में जीवन बिताने को विवश नहीं होगा।
कहां से मिली प्रेरणा:
नारायण बताते हैं कि उनका बचपन गरीबी में बीता मां सर पर टोकरी रखकर फेरी लगाकर सब्जी बेचती थी और हम पांच भाई बहनों का भरण पोषण करती थी। मेरी मां से ही मुझे दूसरों की सहायता करने की प्रेरणा मिली। गरीब असहाय में मैं अपना बचपन देखता हूं। इसलिए मैं हर संभव प्रयास करता हूं कि जो परेशानी मैंने उठाई है वह कोई और ना उठाएं। यही सोच कर मैं उनकी मदद में जुड़ जाता हूं।
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