रायसेन/बरेली, श्रेष्ठ कर्म से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है - दीदी माधवी। - Ghatak Reporter

Ghatak Reporter

एक नज़र निष्पक्ष खबर. तथ्यों के साथ, सत्य तक।


BREAKING

Post Top Ad

Wednesday, March 3, 2021

रायसेन/बरेली, श्रेष्ठ कर्म से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है - दीदी माधवी।

पहले खबर पाने के लिए यहाँ लिंक पर क्लिक कर एप्लीकेशन डाउनलोड करें

श्रेष्ठ कर्म से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है - दीदी माधवी।

  • श्री शिव महिला मंडल के द्वारा चल रही भागवत कथा।

रायसेन/बरेली, श्रेष्ठ कर्म से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है - दीदी माधवी।

घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे, रायसेन/बरेली।
बरेली। श्री शिव महिला मंडल बरेली के तत्वावधान में पशु चिकित्सालय रोड पर आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा पुराण ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस वृन्दावन धाम से पधारी राष्ट्रीय संत प्रवक्ता दीदी सखी माधवी और भागवत कथा की पूजन अर्चना कथा के मुख्य यजमान प्रीति पूरन सिंह धाकड के द्वारा की गई। तत्पश्चात कथा का श्रवण प्रारंभ किया गया राष्ट्रीय संत प्रवक्ता दीदी सखी माधवी ने कथा पांडाल में उपस्थिति कथा का रसपान करने पहुंचे श्रद्धालुओं को राजा परीक्षित की मोक्ष की कथा का श्रवण कराया उन्होने कहा कि श्रंगी ऋषि के श्राप को पूरा करने के लिए तक्षक नामक सांप भेष बदलकर राजा परिक्षित के पास पहुंचकर उन्हें डंस लेते हैं और जहर के प्रभाव से राजा का शरीर जल जाता है और मृत्यु हो जाती है। लेकिन श्रीमद् भागवत कथा सुनने के प्रभाव से राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्त होता है।


पिता की मृत्यु को देखकर राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय क्रोधित होकर सर्प नष्ट हेतु आहुतियां यज्ञ में डलवाना शुरू कर देते हैं जिनके प्रभाव से संसार के सभी सर्प यज्ञ कुंडों में भस्म होना शुरू हो जाते हैं तब देवता सहित सभी ऋषि मुनि राजा जनमेजय को समझाते हैं और उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। दीदी माधवी ने कहा कि कथा के श्रवण प्रवचन करने से जन्म-जन्मांतरों के पापों का नाश होता है और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। कथा वाचक ने प्रवचन करते हुए कहा कि संसार में मनुष्य को सदा अच्छे कर्म करना चाहिए तभी उसका कल्याण संभव है। माता-पिता के संस्कार ही संतान में जाते हैं। संस्कार ही मनुष्य को महानता की ओर ले जाते हैं। श्रेष्ठ कर्म से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। वही प्रभु भक्त धु्रव की कथा का श्रवण कराते हुए बताया कि स्वायंभुव मनु की पत्नी का नाम शतरूपा था। इन्हें प्रियव्रत, उत्तानपाद आदि 7 पुत्र और देवहूति, आकूति तथा प्रसूति नामक 3 कन्याएं हुई थीं। शतरूप के पुत्र उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नामक दो पत्नियां थीं।

रायसेन/बरेली, श्रेष्ठ कर्म से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है - दीदी माधवी।

राजा उत्तानपाद के सुनीति से ध्रुव तथा सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र उत्पन्न हुए। धु्रव को जब सौतेली मां ने उनकी पिता की गोदी में बैठने से मना किया तो धु्रव भगवान की शरण में चले गए और घोर तपस्या करने लगे भूखे प्यासे रहकर पैर के एक अंगूठे के बल पर खडे होकर नारायण का जाप करने लगे और अपनी सांसे रोक ली तभी सारे देवी-देवता घबरा गये और नारायण की शरण में पहुंचे तब नारायण ने धु्रव को दर्शन देने उनके समक्ष विशाल रूप में प्रकट हुए। धु्रव को नारायण ने अपनी शरण में लिया जो प्रभु की भक्ति करता है प्रभु उसे अपनी शरण में लेते हैं। कथा के अंत में भगवान नारायण और धु्रव के पात्ररूपी झांकी कथा मंच पर लगाई गई जहां मुख्य यजमान प्रीति पूरन सिंह धाकड के द्वारा भगवान की पूजन अर्चना कर उनसे आर्शीवाद लिया। और अंत में श्रद्धालुओं ने भी भगवान की पूजा अर्चना की।

No comments:

Post a Comment

ghatakreporter.com मै आपका स्वागत है।
निस्पक्ष खबरों के लिए निरंतर पढ़ते रहें घातक रिपोर्टर
आपकी टिप्पड़ी के लिए धन्यवाद

Post Bottom Ad

Read more: https://html.com/javascript/popup-windows/#ixzz6UzoXIL7n
close
Do you have any doubts? chat with us on WhatsApp
Hello, How can I help you? ...
Click me to start the chat...