मनगढ़ंत डर दिखाकर देश को गुमराह करने की राजनीति बंद होनी चाहिए।
- यह केवल राजनीतिक बयानबाज़ी भर नहीं तो
- सवाल फिर देश की सीमा कितना सुरक्षित
- सवाल फिर देश का नागरिक कितना सुरक्षित
- यदि खतरा वास्तविक है, तो सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि
जिस तरीके से संषद मैं हंगामा बरपा है, वहां हम सोचने पर मजबूर हैं, सवाल ज्वलंत हैं जबाब तो देना होगा
झोला, बैग, पैंट, बेल्ट और जूते तक स्कैन किए जाते हैं। चाकू, छुरी, रिवॉल्वर, पिस्तौल या किसी भी प्रकार के हथियार ले जाने की अनुमति नहीं होती तो फिर खतरा कैसा ।
सांसद सामान्यतः पेन, पेंसिल और काग़ज़ के कुछ पन्नों के साथ ही सदन में प्रवेश करते हैं। जब संसद भवन के हर कोने में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। खुफिया एजेंसियाँ, दिल्ली पुलिस, संसद सुरक्षा बल, अर्धसैनिक बल और सर्वोच्च स्तर पर SPG सुरक्षा प्रधानमंत्री की रक्षा में तैनात रहती है। सोचना होगा यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था है। ऐसी स्थिति में यह प्रश्न उठता है कि संसद परिसर के भीतर प्रधानमंत्री पर हमला आखिर कर कौन सकता है? कितना घम्भीर है, यदि प्रधानमंत्री पर हमले को लेकर किसी “सूत्र” के हवाले से बातें कही जा रही हैं, तो यह केवल एक सुरक्षा चिंता का विषय नहीं है, बल्कि देश की अस्प्रमिता के साथ-साथ शासनिक और सुरक्षा व्यवस्था की कार्यक्षमता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है ।
यदि खतरा वास्तविक है, तो सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि
- क्या हमलावरों की पहचान की गई?
- क्या उन्हें हिरासत में लिया गया?
- क्या संसद और देश को आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी दी गई?
- और यदि यह केवल राजनीतिक बयानबाज़ी है,
लोकतंत्र में सत्ता का अर्थ केवल शासन करना नहीं होता है
यह संसद है, पड़ोसी देश की सीमा रेखा नहीं। संसद संविधान की आवाज़ के लिए बनी है, यहां सांसद जनता के प्रतिनिधि बन कर आते हैं, कुछ कहने लिए आते हैं, कुछ बोलने के लिए आते हैं।
पूर्व सेना प्रमुख की किताब, चीन और एप स्टीन से जुड़े मसलों, अमेरिका से हुए ट्रेड डील और अन्य ज्वलंत प्रश्नों से मुंह चुरा कर भागने के लिए कोई भी शॉर्ट कट नहीं लिया जाना चाहिए।
सांसदों का मुंह बंद कराने के लिए
संसद की कार्यवाही और जिम्मेदारियों से भागना किसी भी सूरत में उचित और लोकतांत्रिक नहीं है।
संसद के सवालों से भागने के लिए किसी काल्पनिक खतरे के आड़ में सांसदों की आवाज़ दबा कर आप लोकतंत्र की हत्या नहीं कर सकते।



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