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Monday, December 7, 2020

संपादकीय, प्रसंगवश; आज के शकुनि व दुर्योधन किस उम्मीद के साथ चलते है चालें ?

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प्रसंगवश

संपादकीय

आज के शकुनि व दुर्योधन किस उम्मीद के साथ चलते है चालें ?

धर्म को बचाने के लिये भगवान श्री कृष्ण ने जब शकुनी और दुर्योधन की कुटिल चालों को नाकाम करते हुए न केवल धर्म को बचाया बल्कि शकुनि व कौरवों का विनाश किया।

संपादकीय, प्रसंगवश; आज के शकुनि व दुर्योधन किस उम्मीद के साथ चलते है चालें ?
संपादक अरविंद सिंह जादौन की कलम से


धृतराष्ट्र, शकुनी मामा, दुर्योधन बन कौरवों की जैसी विशाल सेना के साथ मिलकर कार्य करने वाले कुछ राजनैतिक, सरकारी अधिकारी, कथित पत्रकार, धर्म का चोला पहने कुछ कथित पंडित समझ ले जिस दिन आपके सामने श्रीकृष्ण और पांडवों जैसे चरित्र वाले व्यक्ति आये तो कुटिल चालों वाले राजनैतिक व्यक्ति, सरकारी अधिकारी, कथित पत्रकार, धर्म का चोला पहन बैठे कुछ कथित पंडित आपका विनाश सुनिश्चित है।

"महाभारत" केवल एक धामिक ग्रंथ ही नहीं "महाभारत" से मानव को जीवन जीने की कला सिखाने के साथ-साथ मानव जीवन के लिए आज भी उपयोगी है। वैसे आज-कल के परिद्रश्यय मैं आज पहले से ज्यादा प्रासंगिक है जितना महाभारत काल मे था। "महाभारत" मैं शकुनि और दुर्योधन दोनों अपनी कुटिल चालों के लिए जाने जाते हैं फिर भी कौरवों के सम्पूर्ण विनाश के लिए ये दोनों ही जिम्मेदार है। आज हम बात करेंगे महाभारत काल के अंतिम पड़ाव की जब 99 कौरव पुत्रों के मारे जाने के बाद पुत्र मोह मैं गान्धारी ने गंगा मैं स्न्नान करवा कर नग्न अवस्था मैं दर्योधन को अपने सामने बुलाया, दर्योधन की इस चाल को भी भगवान श्रीकृष्ण ने कैसे विफल किया। शकुनी बहुत अच्छे से जानते थे कि सीधे युद्ध में पांडवों से जीत पाना संभव नहीं है इसलिए दुर्योधन और शकुनि दोनों मिलकर निरंतर चालें चलते रहते थे। जहां दुर्योधन का गदा युद्ध में भीम से जीत पाना संभव नहीं था। इसलिए पहले ही शकुनि ने चाल चलकर श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम से शिक्षा दिलवाकर दुर्योधन को गदा युद्ध में निपुण किया। इस बात को श्रीकृष्ण भगवान बहुत अच्छे से समझते थे कि यह तैयारी किस लिए की जा रही है आखिर कृष्ण भगवान तो स्वयं भगवान थे उनसे क्या छिपा था। कृष्ण भगवान ने भी शकुनी और दुर्योधन की कुटिल चालों को समाप्त कर धर्म बचाने के लिए हर उस चाल को विफल किया जिससे मानव जाति को राक्षस प्रवर्ति मैं बदला जा सकता था। जब गांधारी का विवाह धृतराष्ट्र से हुआ तो गांधारी ने अपने आंखों पर पट्टी यह सोचकर बांध ली कि जब मेरे पति को ही नहीं दिखता तो मैं दुनिया को देख कर क्या करूंगी, गांधारी एक शिव भक्त थीं और उनको वरदान प्राप्त था कि जब भी वह आंखों की पट्टी खोलेंगी और जो भी सामने होगा वह वज्र का हो जाएगा।
            और भीम से गदा युद्ध मे जीत अवश्य ही दृर्योधन कि होगी मगर ये धर्म व मानव जाति के लिए सही नहीं होता इसलिए भगवान कृष्ण ने कैसे इस कुटिल चाल को भी कैसे विफल किया।

निरंतर......

संपादक, घातक रिपोर्टर, अरविंद सिंह जादौन की कलम से

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