रायपुर : मनरेगा से संपन्नता की कहानी गढ़ते संपत।
संपत सिंह के परिवार में माँ मानकुंवर, पिता बुद्धु सिंह और पत्नी सुनीता सहित चार सदस्य हैं। अपने खेत में डबरी निर्माण के बारे में संपत बताते हैं कि उनके पिता के नाम पर गाँव में कुल आठ एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से चार एकड़ भूमि घर से लगकर है। सिंचाई के साधनों के अभाव में पूरी की पूरी जमीन असिंचित थी। गाँव में उनके चाचा और पड़ोस के अन्य किसानों के खेतों में डबरी बनने के बाद से उनकी खेती और जीवन में आये परिवर्तन ने ही उन्हें अपने खेत में डबरी बनाने के लिए प्रेरित किया। ग्राम पंचायत की मदद से मनरेगा से उनके खेत में डबरी बनी है। वे डबरी की बदौलत इस साल रबी फसल के रूप में गेहूँ लगाने की तैयारी में हैं।
संपत सिंह बताते हैं कि मनरेगा के तहत सितम्बर-2019 में उनके पिता बुद्धु सिंह के नाम से खेत में डबरी निर्माण के लिए एक लाख 80 हजार रूपए स्वीकृत हुए थे। इस साल लॉक-डाउन के दौरान डबरी का काम पूरा हुआ। इस काम में मनरेगा मजदूरी के रूप में उनके परिवार को 18 हजार रूपए की मजदूरी प्राप्त हुई। संपत सिंह ने इस राशि से बिजली से चलने वाला दो हॉर्सपावर का एक पम्प खरीदा, जिसका उपयोग वे डबरी से सिंचाई में करते हैं। डबरी में मछली पालन के लिए उन्होंने पाँच किलो मछली बीज डाला है। मनरेगा से खुदी यह डबरी संपत सिंह और उनके परिवार की कृषि आधारित आजीविका को मजबूत करने के साथ ही सब्जियों की खेती तथा मछली पालन के रूप में कमाई का अतिरिक्त साधन भी मुहैया करा रहा है। मनरेगा से मिला संबल उनके परिवार को संपन्नता की राह दिखा रहा है।




No comments:
Post a Comment
ghatakreporter.com मै आपका स्वागत है।
निस्पक्ष खबरों के लिए निरंतर पढ़ते रहें घातक रिपोर्टर
आपकी टिप्पड़ी के लिए धन्यवाद