रायसेन/सिलवानी, भागवत कथा अमृत है, जिसके द्वारा आत्म कल्याण होता है - आचार्य डॉ रामाधार उपाध्याय। - Ghatak Reporter

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Friday, March 5, 2021

रायसेन/सिलवानी, भागवत कथा अमृत है, जिसके द्वारा आत्म कल्याण होता है - आचार्य डॉ रामाधार उपाध्याय।

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भागवत कथा अमृत है, जिसके द्वारा आत्म कल्याण होता है - आचार्य डॉ रामाधार उपाध्याय।

रायसेन/सिलवानी, भागवत कथा अमृत है, जिसके द्वारा आत्म कल्याण होता है - आचार्य डॉ रामाधार उपाध्याय।

घातक रिपोर्टर, जसवंत साहू, रायसेन/सिलवानी।
सिलवानी। विकासखंड के ग्राम मढ़िया देवरी में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन कमलेश पटेल के द्वारा किया जा रहा है। कथा के दौरान व्यासपीठ से आचार्य डॉ. रामाधार उपाध्याय ने श्रद्धालु जनों को संबोधित करते हुए श्रीमद् भागवत महापुराण की महिमा के वर्णन में कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण कथा वह अमृत है, जिसके द्वारा आत्म कल्याण होता है। जीव अनेक योनियों में अनंत जन्मों से भटक रहा है। जन्म मरण के चक्र से मुक्ति का माध्यम श्रीमद् भागवत महापुराण में प्राप्त हो जाता है। संसार में जितने भी जीव हैं वह अज्ञानता के कारण स्वयं को शरीर मन बैठे हैं लेकिन वस्तुतः वह शरीर नहीं है वह शुद्ध, बुद्ध, चैतन्य, परमात्मा का स्वरूप ही हैं। लेकिन माया के आवरण के कारण जीव भ्रमित है, स्वयं को शरीर मान बैठा है। यह भौतिक जगत के फल स्वरुप जीव को इस संसार में बांध रखा है जबकि संसार नश्वर है, मिथ्या है। इसी प्रकार शरीर भी नश्वर है, लेकिन जो आत्म तत्व है वह शुद्ध रूप से परमात्मा का ही अंश है।

रायसेन/सिलवानी, भागवत कथा अमृत है, जिसके द्वारा आत्म कल्याण होता है - आचार्य डॉ रामाधार उपाध्याय।

इसे जानने का ज्ञान श्रीमद्भागवत के माध्यम से हमको हो सकता है। समस्त योनियों में मानव की योनि सर्वश्रेष्ठ है और इसी में हमें आभास होता है कि हम अन्य जीवो से अलग हैं। बौद्धिकता और संवेदनशीलता से संबंधित हमारा व्यक्तित्व हमें अन्य जीवो से अलग बनाता है। प्रकृति ने बड़े सृजन के साथ मनुष्य को समस्त देह धारियों से अलग किया है। इसी तारतम्य में हमारा दायित्व बहुत बढ़ जाता है कि हम बड़े पुण्यों से प्राप्त इस शरीर को प्राप्त करके अपने परलोक सुधारने का कार्य जीवन काल में कर लें। आगे पंडित उपाध्याय जी ने भगवान श्री कृष्ण के द्वारा कंस वध की कथा सुनाते हुए कहा कि जब भी कोई दुराचारी, अत्याचारी सज्जनों के ऊपर अत्याचार करेगा तो उसका अंत निकट भविष्य में अनिवार्य रूप से होगा। देर तो होगी लेकिन अंधेर कभी नहीं होगा। भगवान श्री कृष्ण ने समस्त नर नारियों के कष्ट को दूर किया एवं उन्होंने अपनी लीलाओं के माध्यम से आध्यात्मिकता का संदेश व्यक्तियों को दिया। कथा का समापन 6 मार्च को होगा।

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