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Tuesday, March 23, 2021

रायसेन/बरेली, महाराज दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए किया था यज्ञ का आयोजन।

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महाराज दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए किया था यज्ञ का आयोजन।

  • भगवान राम, लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघन के जन्म का उत्सव कथा पांडाल में मनाया गया।

रायसेन/बरेली, महाराज दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए किया था यज्ञ का आयोजन।

घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे, रायसेन/बरेली।
बरेली। श्री नरसिंह टेकरी प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के तीसरे दिन कथा वाचक महंत डॉ. प्रज्ञाभारती ने रामकथा में राम जन्म महोत्सव की कथा का विस्तार पूर्वक वर्णन करते हुए बताती हैं कि महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया। उन्होनेे श्यामकर्ण घोडों को चतुरंगिनी सेना के साथ छुडवाने का आदेश दिया। महाराज ने समस्त मनस्वी, तपस्वी, विद्वान ऋषि-मुनियों तथा वेदविज्ञ प्रकाण्ड पण्डितों को बुलावा भेजा वो चाहते थे कि सभी यज्ञ में शामिल हों। यज्ञ का समय आने पर महाराज दशरथ सभी अभ्यागतों और अपने गुरु वशिष्ठ जी समेत अपने परम मित्र अंग देश के अधिपति लोभपाद के जामाता ऋंग ऋषि के साथ यज्ञ मण्डप में पधारे। फिर विधिवत यज्ञ शुभारंभ किया गया। यज्ञ की समाप्ति के बाद समस्त पण्डितों, ब्राह्मणों, ऋषियों आदि को यथोचित धन-धान्य, गौ आदि भेंट दी गई और उन्हें सादर विदा किया गया। कथा वाचक आगे की कथा सुनाते हुए कहती हैं कि यज्ञ के प्रसाद में बनी खीर को राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानियों को दी। प्रसाद ग्रहण करने के परिणामस्वरूप तीनों रानिया गर्भवती हो गईं।


सबसे पहले महाराज दशरश की बड़ी रानी कौशल्या ने एक शिशु को जन्म दिया जो बेहद ही कान्तिवान, नील वर्ण और तेजोमय था। इस शिशु का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। इस समय पुनर्वसु नक्षत्र में सूर्य, मंगल शनि, वृहस्पति तथा शुक्र अपने-अपने उच्च स्थानों में विराजित थे साथ ही कर्क लग्न का उदय हुआ था। फिर शुभ नक्षत्रों में कैकेयी और सुमित्रा ने भी अपने-अपने पुत्रों को जन्म दिया। कैकेयी का एक और सुमित्रा के दोनों पुत्र बेहद तेजस्वी थे। महाराज के चारों पुत्रों के जन्म से सम्पूर्ण राज्य में आनन्द का माहौल था। हर कोई खुशी में गन्धर्व गान कर रहा था और अप्सराएं नृत्य करने लगीं। देवताओं ने पुष्प वर्षा की। महाराज ने ब्राह्मणों और याचकों को दान दक्षिणा दी और उन सभी ने महाराज के पुत्रों को आशीर्वाद दिया।


प्रजा-जनों को महाराज ने धन-धान्य और दरबारियों को रत्न, आभूषण भेंट दी। महर्षि वशिष्ठ ने महाराज के पुत्रों का नाम राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखा। कथा के अंत में कथा के मुख्य यजमान ज्योति अरविंद मालवीय ने कथा वाचक से आर्शीवाद लेते हुए शास्त्र की ओर कथा वचाक की पूजन अर्चना की। इनके ही द्वारा कथा का मुख्य आयोजन करवाया जा रहा है।

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