आगर-मालवा/नलखेड़ा, प्राचीन काल से ही हमारे समाज में नारी का विशेष स्थान रहा है, देवी शक्तियाँ वही पर निवास करती है जहाँ पर नारी जाति को प्रतिष्ठा व सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है - शिक्षक मुकेश चौरसिया। - Ghatak Reporter

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Sunday, March 7, 2021

आगर-मालवा/नलखेड़ा, प्राचीन काल से ही हमारे समाज में नारी का विशेष स्थान रहा है, देवी शक्तियाँ वही पर निवास करती है जहाँ पर नारी जाति को प्रतिष्ठा व सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है - शिक्षक मुकेश चौरसिया।

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प्राचीन काल से ही हमारे समाज में नारी का विशेष स्थान रहा है, देवी शक्तियाँ वही पर निवास करती है जहाँ पर नारी जाति को प्रतिष्ठा व सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है - शिक्षक मुकेश चौरसिया।

आगर-मालवा/नलखेड़ा, प्राचीन काल से ही हमारे समाज में नारी का विशेष स्थान रहा है, देवी शक्तियाँ वही पर निवास करती है जहाँ पर नारी जाति को प्रतिष्ठा व सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है - शिक्षक मुकेश चौरसिया।

घातक रिपोर्टर, ईश्वर सिंह सोनगरा, आगर-मालवा/नलखेड़ा।
नलखेड़ा। प्राचीन काल से ही हमारे समाज में नारी का विशेष स्थान रहा है। हमारे पौराणिक ग्रंथों में नारी को पूज्यनीय और देवी तुल्य माना गया है। हमारी धारणा रही है कि देवी शक्तियाँ वही पर निवास करती है जहाँ पर नारी जाति को प्रतिष्ठा व सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। ये विचार शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक मुकेश चौरसिया ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष 8 मार्च को पूरे विश्व मे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है बच्चों में संस्कार भरने का काम माँ के रूप में नारी द्वारा ही किया जाता है। यह तो हम सभी जानते हैं कि बच्चों की प्रथम गुरु माँ ही होती है। माँ के व्यक्तित्व-कृतित्व का बच्चों पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार का प्रभाव पड़ता है। इतिहास पर गौर करें तो माँ पुतलीबाई ने महात्मा गाँधी और जीजाबाई ने शिवाजी में श्रेष्ठ संस्कारों का बीजारोपण किया था जिसका परिणाम है कि शिवाजी और गाँधीजी को हम आज भी उनके श्रेष्ठ कर्मों के कारण जानते हैं, इनका व्यक्तित्व विराट व अनुपम है। बेहतर संस्कार देकर बच्चों को समाज में उदाहरण बनाना नारी ही कर सकती है। इतिहास में देवी अहिल्याबाई होल्कर, मदर टेरेसा, महादेवी वर्मा, सुचेता कृपलानी और अरुण आसफ अली आदि कई महिलाओं ने अपने मन-वचन और कर्म से सारे संसार में अपना नाम रोशन किया है। वर्तमान युग को नारी उत्थान का युग कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। आज हमारे देश में भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। समाज निर्माण में जितना योगदान पुरुषों का होता है उतना योगदान नारी का भी होता है परंतु जिस प्रकार का सम्मान समाज में पुरुषों को मिलता है उतना नारी को नहीं मिल पाता है। अगर हम इतिहास की माने तो हम पाते है की नारी ने पुरुष के सम्मान और प्रतिष्ठा के लिए स्वयं की जान भी दांव पर लगा दी। नारी के इसी पराक्रम के चलते यह कहावत चरितार्थ हुई कि प्रत्येक पुरुष की सफलता के पीछे एक स्त्री का हाथ होता है। कोई भी परिवार, समाज तथा राष्ट्र तब तक सच्चे अर्थों में प्रगति की ओर अग्रसर नहीं हो सकता जब तक वह नारी के प्रति भेदभाव, निरादर तथा हीनभावना का त्याग नहीं करता है। जयशंकर प्रसाद ने क्या खूब लिखा है नारी तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास-रजत-नग पगतल में। पियूष-स्त्रोत  सी बहा करो जीवन के सुंदर समतल में।

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