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Thursday, March 4, 2021
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रायसेन/बरेली, तीन शताब्दी पुरानी है भगवान आदिनाथ की मूर्ति, आचार्य श्री के द्वारा किया जा रहा है जीर्णोद्धार।
रायसेन/बरेली, तीन शताब्दी पुरानी है भगवान आदिनाथ की मूर्ति, आचार्य श्री के द्वारा किया जा रहा है जीर्णोद्धार।
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घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे, रायसेन/बरेली।
बरेली। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ग्राम खरगोन जहां के धाकड़ मोहल्ला जिसे कि पुराना खरगोन भी कहा जाता है यहां पर लगे सैकड़ों वर्ष पुराने इमली के पेड़ के नीचे रखी भगवान आदिनाथ की मूर्ति के दर्शन करने के लिए कर्नाटक से पधारे आचार्य श्री कुलरत्न भूषण जी महाराज जोकि श्री विद्यासागर जी महाराज के दर्शन हेतु नेमावर पधारे थे। नेमावर से आचार्य श्री बुंदेलखंड के तीर्थ वंदना हेतु बरेली होते हुए खरगोन सिलवानी मार्ग से बुंदेलखंड पहुंचेंगे इसी दौरान ग्राम खरगोन में इमली के पेड़ के नीचे सैकड़ों साल से रखी भगवान आदिनाथ की मूर्ति के दर्शन के लिए पहुंचे। इस दौरान आचार्य श्री ने मूर्ति को पूजन विधान और जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ करवाया।
यहां निवास करने वाले लोगों को कहना है कि हमारा पूरा जीवन गुजर गया लेकिन हमारे पिता और दादा के जमाने से यह मूर्ति यहीं पर रखी हुई है ऐसा हमें हमारे दादा बताते थे कि हमने भी इस मूर्ति को इसी स्थान पर बरसों से देखा है।
इस संबंध में इमली के पेड़ के बाजू में रहने वाले प्रेम शंकर पटेल ने बताया कि सभी मोहल्ले वासी खोना बाबा के नाम से इनकी पूजा करते हैं जल चढ़ाते हैं कभी भी किसी को दुख तकलीफ होती है तो मात्र यहां पर प्रसाद चढ़ाने से तत्काल छुटकारा मिलता है। साथ ही यदि पशु को किसी प्रकार की तकलीफ होती है जैसे गाय के थनो से खून आता हे तो यहां पर प्रसाद चढ़ाने से पशु को भी आराम मिलता है।
मूर्ति के दर्शन हेतु पूर्व में यहां पर वर्ष 1998 में आचार्य विद्यासागर महाराज जी ने झुकी हुई मूर्ति को सीधा करवा दिया था लेकिन कालांतर में और मूर्ति झुकती गई सहित कई मुनि आ चुके हैं दर्शन के लिए इसी क्रम में इस मार्ग से बिहार करते हुए आचार्य कुलरत्न भूषण महाराज के द्वारा इस मूर्ति के दर्शन किए गए जिन्होंने देखा कि मूर्ति काफी मात्रा में आड़ी हो चुकी थी जिन्होंने सर्वप्रथम दो बार शंखनाद कर पूजन प्रारंभ कर मूर्ति को सीधा किया साथ ही अपने साथ चल रहे कलाकार के द्वारा मूर्ति का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
इस संबंध में आचार्य कुलरत्न भूषण जी महाराज ने बताया कि यह प्रतिमा अतिशय कारी और प्रभावशाली है क्योंकि मूर्ति के पीछे दोनों तरफ दो सिंह हैं जैसे कुंडलपुर की मूर्ति में सिंह है। साथ ही यह मूर्ति पूर्व मुखी है उन्होंने बताया कि इस मूर्ति के दर्शन मात्र से श्रावक को मनचाहा फल प्रदान होगा।
आचार्य श्री ने बताया कि आदिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक मंगल पूजा फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी शिवरात्रि के दिन 108 मंगल कलशो से महा मस्तकाभिषेक किया जाएगा। खरगोन के पास से निकलने वाली इक्यावन नदी से पूर्व में कई प्राचीन काल की जैन प्रतिमाएं निकल चुकी है लेकिन पुरातत्व विभाग के द्वारा पुरातात्विक संपदा मानते हुए उन मूर्तियों को संग्रहालय ले जाया जा चुका है जिनमें अधिकतर मूर्तियां खंडित हैं।
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