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Thursday, March 4, 2021

रायसेन/सिलवानी, मानव के लिए परमात्मा की शरण में ही सच्चा सुख है - आचार्य डॉ रामाधार उपाध्याय।

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मानव के लिए परमात्मा की शरण में ही सच्चा सुख है - आचार्य डॉ रामाधार उपाध्याय।

रायसेन/सिलवानी, मानव के लिए परमात्मा की शरण में ही सच्चा सुख है - आचार्य डॉ रामाधार उपाध्याय।

घातक रिपोर्टर, जसवंत साहू, रायसेन/सिलवानी।
सिलवानी। विकासखंड के ग्राम मढ़िया देवरी में कमलेश पटेल के द्वारा श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें व्यासपीठ से धर्म प्रेमी सज्जनों, माताओं, बहनों को संबोधित करते हुए कथा व्यास आचार्य डॉ. रामाधार उपाध्याय ने कहा कि मानव के जीवन में सच्चा सुख परमात्मा की शरण में है, शेष सुख नगण्य हैं जिनका कोई अस्तित्व नहीं है। भौतिक जगत के जितने भी बाहरी सुख हैं जो दिखाई देते हैं, वह हैं नहीं वह मात्र आभास हैं जबकि आत्मिक सुख मात्र परमात्मा की शरण का आश्रय ग्रहण करने में ही प्राप्त हो सकता है। मनुष्य को चाहिए कि अपनी समस्त कामनाओं पर नियंत्रण रखते हुए सभी प्रकार के मोह त्याग कर परमात्मा की शरण का आश्रय प्राप्त करके अपने जीवन का निर्वाह करें। आगे पंडित उपाध्याय जी ने कहा कि यह जगत मिथ्या है और अपना नहीं है। लेकिन परमात्मा अपने हैं, परमात्मा से हमारा संबंध निरंतर है, शाश्वत है अनेक युगों से रहा है।

रायसेन/सिलवानी, मानव के लिए परमात्मा की शरण में ही सच्चा सुख है - आचार्य डॉ रामाधार उपाध्याय।

उस सत्य संबंध को ही स्वीकार करके अपने आत्म कल्याण के लिए इस जीवन काल में प्रयास करना चाहिए। वह परमार्थिक सत्ता संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है उसी सत्ता का आश्रय ग्रहण करके हम अपनी आत्म चेतना का जागरण समय सीमा में अर्थात जब तक हमारा जीवन है जब तक कर लें। अन्यथा हमारे हाथ में पश्चाताप के सिवा कुछ नहीं रहेगा। आगे पंडित उपाध्याय जी ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण लीलाओं के माध्यम से समस्त बृज को आनंदित करते हैं एवं उनके प्रबल विरोधी कंस ने उन को मारने के लिए अनेक राक्षसों को भेजा तो प्रभु श्री कृष्ण ने उन राक्षसों को उनके जीवन से मुक्त कर दिया। कहने का आशय यह है कि जब संसार में विनाशकारी शक्तियां वृद्धि प्राप्त करेंगीं तो उनको नष्ट करने के लिए सात्विक सत्ता का प्रादुर्भाव होगा और परमात्मा के अनुग्रह से समस्त अत्याचारियों का नाश होना सुनिश्चित रहेगा।

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