रायसेन/बरेली, भगवान कृष्ण और रुक्मणी के विवाह में भक्तजनों ने पूजन अर्चना कर उपहार किये भेंट, श्री शिव महिला मंडल के द्वारा आयोजित कथा में उमड़ रहा जन सैलाब। - Ghatak Reporter

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Saturday, March 6, 2021

रायसेन/बरेली, भगवान कृष्ण और रुक्मणी के विवाह में भक्तजनों ने पूजन अर्चना कर उपहार किये भेंट, श्री शिव महिला मंडल के द्वारा आयोजित कथा में उमड़ रहा जन सैलाब।

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भगवान कृष्ण और रुक्मणी के विवाह में भक्तजनों ने पूजन अर्चना कर उपहार किये भेंट, श्री शिव महिला मंडल के द्वारा आयोजित कथा में उमड़ रहा जन सैलाब।

रायसेन/बरेली, भगवान कृष्ण और रुक्मणी के विवाह में भक्तजनों ने पूजन अर्चना कर उपहार किये भेंट, श्री शिव महिला मंडल के द्वारा आयोजित कथा में उमड़ रहा जन सैलाब।

घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे, रायसेन/बरेली।
बरेली। श्री शिव महिला मंडल के तत्वावधान में गर्राज कालोनी पशु चिकित्सालय मार्ग पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के छटवे दिवस वृन्दावन धाम से कथा पांडाल में कथा का श्रवण कराने आईं दीदी सखी माधवी ने श्री कृष्ण और रुक्मणी के विवाह का प्रसंग सुनाया साथ ही कलाकारों द्वारा उनकी सुंदर-सुंदर स्वरूप से भक्तो को प्रसंग का मंचन कर मंदमुग्द किया। अपने प्रवचनों में दीदी माधवी ने बताया कि श्री कृष्ण के पास जब रुक्मणी ने संदेश भेजा था कि रुक्मणी के घरवाले इनका विवाह कहीं और करना चाहते हैं तब उन्होंने श्री कृष्ण से कहा की वह श्री कृष्ण से ही विवाह करना चाहती हैं क्योंकि विश्व में उनके जैसा अन्य कोई पुरुष नहीं है।


भगवान श्री कृष्ण के गुणों और उनकी सुंदरता पर मुग्ध होकर रुक्मणी ने मन ही मन निश्चय किया कि वह श्रीकृष्ण को छोडकर किसी को भी पति के रूप में वरण नहीं करेंगी, उधर श्री कृष्ण भगवान को भी इस बात का पता लग चुका था कि रुकमणी परम रूपवती तो है ही इसके साथ-साथ परम सुलक्षणा भी हैं। अपने वर्णन में उन्होंने बताया कि भीष्मक का बड़ा पुत्र रुकनी भगवान श्री कृष्ण से शत्रुता रखता था वह अपनी बहन रुक्मणी का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था। कथा व्यास दीदी आगे कहती है कि जब रुकमणी ने गिरजा मां की पूजा करते हुए उनसे प्रार्थना की हे मां तुम सारे जगत की मां हो इसलिए मेरी भी अभिलाषा पूर्ण करो मैं श्रीकृष्ण को छोडक़र किसी अन्य पुरुष के साथ विवाह नहीं कर सकती रुक्मणी जब मंदिर से बाहर निकली तो उन्हें एक ब्राह्मण दिखाई दिया देखकर वह बहुत प्रसन्न हुई उन्हें यह समझने में बिल्कुल भी संशय नहीं रहा कि श्री कृष्ण भगवान ने ही उसके समर्पण को स्वीकार कर लिया है और श्री कृष्ण जी ने विद्युत तरंग की भांति पहुंचकर उनका हाथ थाम लिया और अपने रथ पर बिठाकर द्वारका की ओर चल पड़े। भगवान श्री कृष्ण रुकमणी को द्वारका ले जाकर उनके साथ विधिवत विवाह किया।


उन्होंने बताया कि प्रद्युम्न उन्हीं के गर्भ से उत्पन्न हुए थे जो सृष्टि में कामदेव के अवतार थे। श्री कृष्ण की पटरानीयों में रुक्मणी का सबसे अधिक महत्वपूर्ण स्थान था उनके प्रेम और उनकी भक्ति पर भगवान श्री कृष्ण मुग्ध थे उनके प्रेम और उनकी कई कथाएं और भी बहुत प्रेरक हैं। कथा पांडाल में श्री कृष्ण और माता रूकमणी के विवाह की आकर्षक झांकी सजाई गई इस दौरान कथा के मुख्य यजमान प्रीति पूरनसिंह धाकड सहित श्री शिव महिला मंडल की अध्यक्ष शीला राय सहित सभी महिला पदाधिकारियों ने भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह में उपहार भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

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