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Friday, April 23, 2021

नरसिंहपुर/तेंदूखेड़ा, प्रतिबंध के बाबजूद भी डेढ़ से दोगुने दामो में बिक रहे गुटखा पाउच।

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प्रतिबंध के बाबजूद भी डेढ़ से दोगुने दामो में बिक रहे गुटखा पाउच।

नरसिंहपुर/तेंदूखेड़ा, प्रतिबंध के बाबजूद भी डेढ़ से दोगुने दामो में बिक रहे गुटखा पाउच।

घातक रिपोर्टर, धर्मेन्द्र साहू, नरसिंहपुर/तेंदूखेड़ा।
तेंदूखेड़ा। केसर के नाम पर केंसर परोस रहे प्रतिबंधित गुटखा पाउच लाकडाउन लगते ही डेढ़ से दोगुने दामो मे बिकना प्रारंभ हो जाते है। मुनाफाखोर 180 की जगह 250 से 300 रू. डिब्बे के हिसाब से बैचना प्रारंभ कर देते है और घातक परिणाम सामने आने के बावजूद भी इन केमिकल गुटखा पाउचों के सेवन करने मे ना केवल बड़े बुजुर्ग शामिल है बल्की महिलाएं और युवा बच्चों मे भी गुटखा खाने की लत पड़ गई है। यह लत से पहले तो मुंह खुलना बंद हो जाता है, फिर धीरे-धीरे मसूड़ो और गालो मे केंसर का रूप धारण करता है। जांच में भी यह साबित हो चुका है कि जर्दा खाने से केंसर होता है इसके बावजूद भी मसाला कंपनियां पाउच के साथ केमिकल मिला जर्दा भी उपलब्ध कराती है जिसके सेवन से सेवनकर्ता गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाता है। क्षेत्र के ऐसे सैकड़ों परिणाम उदाहरण स्वरूप सामने घटित हो चुके है फिर भी लोग इसका सेवन करना बंद नहीं कर रहे है। यह लत इतनी बुरी स्थिति में पंहुच गई है कि इसे हर कीमत पर खरीदने को तैयार है। रोजमर्रा की आवश्यक जरूरतों में कटौती कर इन पाउचों को हर कीमत पर खरीदने के लिये तैयार रहते है। छोटे-छोटे बच्चों में यह धीमा जहर काफी प्रभाव कर रहा है फिर भी पालकगण अपने बच्चों की तरफ ध्यान नहीं दे रहें है। इसका प्रमुख कारण यह भी बताया जा रहा है कि स्वयं पालक इस गतिविधि में शामिल है इस बजह से पूरी तरह सख्ती से इन पर प्रतिबंध नहीं लग पाता है।

शौकिया मिजाज में झुलस रही युवा पीढ़ी

वर्तमान समय दिखावे का समय है, रोज बदलती फैशनों के चक्कर मे आकर युवा केवल गुटखो तक ही सीमित नही है। बल्कि विभिन्न प्रकार के व्यसनो का सेवन कर बर्बादी की कगार पर पंहुच रहे है, कुछ परिवार भी तबाह हो चुके है। जिनके परिवारों में एक ही चिराग था व्यसनों की लत में वह भी बुझ चुके है। बुजुर्ग माता-पिता अन्याश्रितआज भी परेशान देखे सुने जा रहे है। जन जागरण अभियानो के माध्यम से व्यसन मुक्त समाज की बाते तो की जाती है लेकिन धरातल पर अमल नहीं हो पा रहा है।

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