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लॉक डाउन से उधोग प्रभावित, 1500 से 2000 करोड़ का अनुमानित नुकसान, 60 प्रतिशत से ज्यादा उधोग बंद।
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| फ़ाइल फोटो |
घातक रिपोर्टर, अरविंद सिंह जादौन, भोपाल।
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रायसेन। कोरोना महामारी के चलते लगाए गए कोरोना कर्फ्यू को रविवार को पूरा एक महीना हो रहा है। इस दौरान जारी कोरोना कर्फ्यू ने उद्योग जगत की कमर तोड़ दी है। उद्योगों से होने वाले उत्पादन में 1 महीने में 60 से 70 प्रतिशत की कमी आ गई है तो वहीं इस दरमियान इतने ही फीसद उद्योग बंद भी हो चुके हैं। उद्यमियों के अनुसार इस 1 महीने में उद्योगों को 1500 से 2000 करोड़ का आर्थिक नुकसान तो हुआ ही है साथ ही कच्चे माल की कमी और उसके बढ़ते भावों ने भी उद्यमियों को परेशान कर रखा है। हालांकि काफी हद तक प्रदेश सरकार ने उद्योगों के संचालन को छूट दे रखी है परंतु मजदूरों के पलायन करने और कोरोना कर्फ्यू में अन्य क्षेत्रों में बंदिशों का असर उद्योगों पर दिखाई दे रहा है। ज्ञात है कि क्षेत्र में छोटे-बड़े लगभग 600 उद्योग संचालित हैं। जिनका वार्षिक टर्नओवर करीब 60 से 65 हजार करोड़ का है। लॉक डाउन से एक और जहां इन सभी उद्योगों को 2000 करोड़ का नुकसान हुआ है तो वही शासन को भी 300 करोड़ों का नुकसान पहुंचा है। तो इधर स्थानीय उद्योगों को कच्चे माल की कमी और उद्योग चलाने के दौरान मेंटेनेंस से जुड़े उपकरणों के नहीं मिलने के साथ ही संक्रमण के चलते भी दिक्कत आ रही है। मजदूरों की कमी भी उत्पादन कम होने की मुख्य वजह बताई जा रही है। इसके अलावा कोरोना से गंभीर रूप से पीड़ित लोगों की जिंदगी बचाने के लिए ऑक्सीजन सप्लाय पर प्रतिबंध लगाए जाने से ऑक्सीजन की कमी से फेब्रिकेशन सेक्टर भारी प्रभावित हुआ है। उद्योगपतियों का कहना है कि ऐसी ही स्थिति रही तो आगामी दिनों में प्रोडक्शन में और कमी आ सकती है।
फॉर्मा उद्योग भी प्रभावित
क्षेत्र में दवाएं बनाने वाली आधा दर्जन छोटी-बड़ी कंपनियां है। कच्चा माल और ऑक्सीजन सप्लाय नहीं होने से इनका उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। दवा बनाने का कई माल विदेशों से भी आता है, कोरोना के चलते आयात प्रभावित है। ल्युपिन कंपनी के मैनेजर अनिल बर्गिस बताते हैं कि पैकिंग मैटेरियल के 30 से 35 और बाकी अन्य रो मटेरियल, केमिकल, केएसएम एवं सॉल्वेंट के भी 10 परसेंट से अधिक दाम बढ गए हैं। वहीं नए आर्डर ना मिलने से 60 से 70 प्रतिशत उत्पादन ही कर रहे हैं।
24 की बजाए 8 घंटे ही चल रहीं फैक्ट्रियां
एएसआईएम के महासचिव नीरज जैन का कहना है कि कई उद्योगों में कच्चे माल की सप्लाय महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, दिल्ली सहित अन्य राज्यों से होती है। अधिकांश प्रदेशों में कोरोना संक्रमण के चलते यातायात बंद है, इसके कारण कच्चा माल नहीं आ रहा है, जिससे उत्पादन प्रभावित है। प्लास्टिक इंडस्ट्री काफी हद तक महाराष्ट्र और गुजरात के कच्चे माल पर निर्भर है। औद्योगिक क्षेत्रों की फैक्ट्रियों को चलाने की अनुमति जरूर दी गई है, लेकिन उद्योगों की मशीनों के मेंटेनेंस से जुड़े उपकरणों और पुर्जों की दुकानें बंद हैं। यह नहीं मिलने से कई बार मशीनें बंद हो जाती हैं और इस कारण उद्योगपतियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अधिकांश फैक्ट्रियों में नियमित रूप से इन कलपुर्जों की जरूरत होती है। बाजार बंद होने से परेशानी आ रही है और उत्पादन गिरा हुआ है। 350 से 400 से ज्यादा उद्योग तो बिक्री नहीं होने से घटे उत्पादन से बंद हो चुके हैं। जो फैक्ट्रियां चल भी रही है उनमें 24 घंटे की वजह 8 घंटे ही उत्पादन हो पा रहा है। वही एचईजी कंपनी के पीआरओ राजेश तोमर का कहना है कि कंपनी का प्रोडक्शन तो पहले की तरह ही चल रहा है परंतु कंपनी ने जो 12 सौ करोड़ का निवेश किया है, इस प्रोजेक्ट में 50 प्रतिशत तक की कमी आ गई है। इसका कारण मजदूरों का पलायन करना है।
इनका कहना है...
लॉकडाउन ने कारखानों की हालत बहुत खराब कर दी है। कच्चा माल ना मिलने और ट्रांसपोर्टेशन की कमी के कारण क्षेत्र के कई उद्योग बंद हो चुके हैं। जो चालू भी है उनमें 50 प्रतिशत तक ही उत्पादन हो पा रहा है। ऐसे ही हालात आगे बने रहे तो उद्योगों की स्थिति और चरमरा जाएगी।
राजीव अग्रवाल, अध्यक्ष एएआईएम, मंडीदीप
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