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Thursday, May 20, 2021

ब्लैक फंगस के बाद अब देश मे व्हाइट फंगस की दस्तक, पटना में 4 मरीज मिलने से अफरा-तफरी, ब्लैक फंगस से ज्यादा खतरनाक ?

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ब्लैक फंगस के बाद अब देश मे व्हाइट फंगस की दस्तक, पटना में 4 मरीज मिलने से अफरा-तफरी, ब्लैक फंगस से ज्यादा खतरनाक ?


ब्लैक फंगस के बाद अब देश मे व्हाइट फंगस की दस्तक, पटना में 4 मरीज मिलने से अफरा-तफरी, ब्लैक फंगस से ज्यादा खतरनाक ?

अब तक ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) से जूझ रहे पटना में व्हाइट फंगस के मरीज मिलने से अफरातफरी मच गई है। ब्लैक फंगस से ज्यादा घातक मानी जाने वाली इस बीमारी के चार मरीज पिछले कुछ दिनों में मिले हैं। व्हाइट फंगस (कैंडिडोसिस) फेफड़ों के संक्रमण का मुख्य कारण है। फेफड़ों के अलावा, स्किन, नाखून, मुंह के अंदरूनी भाग, आमाशय और आंत, किडनी, गुप्तांग और ब्रेन आदि को भी संक्रमित करता है। PMCH में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के हेड डॉ. एसएन सिंह के मुताबिक, अब तक ऐसे चार मरीज मिले जिनमें कोविड-19 जैसे लक्षण थे, पर वे कोरोना नहीं बल्कि व्हाइट फंगस से संक्रमित थे। मरीजों में कोरोना के तीनों टेस्ट रैपिड एंटीजन, रैपिड एंटीबॉडी और आरटी-पीसीआर निगेटिव थे। जांच होने पर सिर्फ एंटी फंगल दवाओं से ठीक हो गए। इसमें पटना के चर्चित सर्जन भी हैं जिन्हें एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया था। जांच से पता चला कि वे व्हाइट फंगस से पीड़ित हैं, एंटी फंगल दवाओं के बाद उनका ऑक्सीजन लेवल 95 पहुंच गया।

अंतर करना मुश्किल

व्हाइट फंगस द्वारा फेफड़ों के संक्रमण के लक्षण एचआरसीटी में कोरोना जैसे ही दिखते हैं, इसमें अंतर करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मरीजों में रैपिड एंटीजन और आरटी-पीसीआर निगेटिव होता है। एचआरसीटी में कोरोना जैसे लक्षण (धब्बे हो) दिखने पर रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट और फंगस के लिए बलगम का कल्चर कराना चाहिए। कोरोना मरीज जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं उनके फेफड़ों को यह संक्रमित कर सकता है। व्हाइट फंगस के भी वही कारण हैं जो ब्लैक फंगस के हैं जैसे प्रतिरोधक क्षमता की कमी। डायबिटीज, एंटीबायोटिक का सेवन या फिर स्टेरॉयड का लंबा सेवन। कैंसर के मरीज जो दवा पर हैं, उन्हें यह जल्दी जकड़ लेता है। नवजात शिशुओं में यह डायपर कैंडिडोसिस के रूप में होता है, जिसमें क्रिमी सफेद धब्बे दिखते हैं। छोटे बच्चों में यह ओरल थ्रस्ट करता है। महिलाओं में यह ल्यूकोरिया का मुख्य कारण है।

बचने के लिए क्या करे

ऐसी स्थिति में जो मरीज ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर हैं उनके ऑक्सीजन या वेंटिलेटर उपकरण विशेषकर ट्यूब आदि जीवाणु मुक्त होने चाहिए। ऑक्सीजन सिलेंडर ह्यूमिडिफायर में स्ट्रेलाइज वाटर का प्रयोग करना चाहिए। जो ऑक्सीजन मरीज के फेफड़े में जाए वह फंगस से मुक्त हो। वैसे मरीजों का रैपिड एंटीजन और आरटी-पीसीआर निगेटिव हो और जिनके एचआरसीटी में कोरोना जैसे लक्षण हों। उनका रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट कराना चाहिए, साथ ही बलगम के फंगस कल्चर की जांच भी कराना चाहिए।

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