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Tuesday, May 18, 2021

नरसिंहपुर/तेंदूखेड़ा, 86 वर्ष की उम्र में रिटायर्ड शिक्षक ने होम क्वारंटाइन रहते हुए जीती कोरोना से जंग।

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86 वर्ष की उम्र में रिटायर्ड शिक्षक ने होम क्वारंटाइन रहते हुए जीती कोरोना से जंग।

नरसिंहपुर/तेंदूखेड़ा, 86 वर्ष की उम्र में रिटायर्ड शिक्षक ने होम क्वारंटाइन रहते हुए जीती कोरोना से जंग।

घातक रिपोर्टर, धर्मेन्द्र साहू, नरसिंहपुर/तेंदूखेड़ा।
तेंदूखेड़ा। कोरोना संक्रमण महामारी उतनी भयाभय नहीं है जितनी कि लोगों ने भय में आकर अनावश्यक तौर से प्रचार-प्रसार कर लोगों में भय का माहौल बना दिया। जिसका जीता जागता उदाहरण यह है कि 86 वर्षीय रिटायर्ड बुद्धिजीवी शिक्षक ग्याप्रसाद जैन ने अपने ही घर पर अलग एक कमरे में होम क्वारंटाइन रहकर 15 दिनों में कोरोना को मात दे दी। मात देने के बाद कुशलतापूर्वक प्रतिदिन की तरह सुबह-शाम टहलना और रूचि के अनुसार पर्याप्त साधारण भोजन लेना स्वभाव में शामिल होते हुए ग्याप्रसाद जैन ने स्पष्ट किया है कि कोरोना संक्रमण को लोगों ने काफी भययुक्त माहौल में लिया है। यदि धैय के साथ इस महामारी से जूझा जाये तो निश्चित तौर पर लोग आसानी से कोरोना को मात दे सकते है। तत्काल आक्सीजन और रेमिडिसिविर इंजेक्शन, मंहगे अस्पतालों के पीछे भागना किसी भी तरह प्राण बचाने की स्थिति में लोग घबराकर यहां-वहां भागते है। जानकार वरिष्ठ डॉक्टरों की सलाह लेते हुए यदि घर पर ही रहकर समय पर दवाओं के साथ परहेज किया जाये तो इस बीमारी को कोई भी व्यक्ति हरा सकता है। अपनी 86 वर्ष की उम्र का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि शारिरिक क्षमताएं भी अब उतनी अधिक नहीं रहीं, लेकिन मन में आत्मबल और जूझने की शक्ति प्रबल होने के कारण आज इस जंग से जीत मिली है। शिक्षक रहने के साथ-साथ साहित्यिक गतिविधियों में हमेशा से कवि के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले मिलनसार हसमुख स्वभाव के धनी ग्याप्रसाद जैन ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि सोशल डिस्टेंश और मुंह पर मास्क के पीछे एक यह कारण है कि हम जितना अधिक संक्रमण को लेकर फासला बनाते हुए अपने घरों पर सुरक्षा से रहेंगे उतना अधिक लाभ सभी को मिलेगा, इससे संक्रमण की चेन टूटने के कारण वह आगे नहीं बढ़ सकेगा। सिलेंण्डर युक्त ऑक्सीजन की बजाय पर्यावरण सुरक्षा और खुली आवोहवा में घूमना सादा शाकाहारी भोजन करने से लोगों में प्रतिरोधक क्षमता अधिक बढ़ती है। जीवन को भौतिकवादी सुविधाओं की बजाय हम प्रकृति से मिले वरदान और उससे मिली वस्तुुओं के सेवन से करेंगे तो निश्चित तौर पर हमारा शरीर हस्ट पुष्ट रहने के साथ स्वस्थ्य और हमारे विचार भी नेक बनते है।

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