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Wednesday, May 19, 2021
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केंद्रीय कृषि मंत्री का काफिला रोककर कार को घेरा तो कलेक्टर ने की किसानों से धक्का- मुक्की, वहीं पुलिस ने की पिटाई।
केंद्रीय कृषि मंत्री का काफिला रोककर कार को घेरा तो कलेक्टर ने की किसानों से धक्का- मुक्की, वहीं पुलिस ने की पिटाई।
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केंद्रीय कृषि मंत्री व क्षेत्रीय सांसद नरेंद्र सिंह तोमर मंगलवार को श्योपुर आए। यहां किसान संयुक्त मोर्चा ने उनके विरोध की तैयारी कर रखी थी जिसकी भनक पुलिस को सुबह ही लग गई। पुलिस ने दो किसान नेताओं को पकड़कर नजरबंद कर दिया, इसके बावजूद प्रशासन संयुक्त किसान मोर्चा का प्रदर्शन नहीं रोक सका। शहर में अजाक थाने के पास पाली रोड पर जब केंद्रीय मंत्री का काफिला गुजरा तो किसानों ने तोमर की कार को घेर लिया और काले झंडे दिखाए। इस पर कलेक्टर व पुलिस ने किसानों से धक्का-मुक्की करने के साथ ही लाठियों से उनकी मारपीट भी कर दी। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार की दोपहर श्योपुर आकर रेस्ट हाउस में भाजपा पदाधिकारियों से चर्चा की। इसके बाद वे कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल की मां के निधन पर शोक जताने उनके घर पहुंचे। जब दोपहर करीब 3.30 बजे उनका काफिला शहर के पाली रोड स्थित अजाक थाना के पास से गुजरा तो विरोध-प्रदर्शन के लिए खड़े किसानों ने उसे रोक लिया और केंद्रीय मंत्री तोमर को काले झंडे दिखाते हुए उनकी कार का घेराव कर दिया। घेराव के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी अनिल सिंह चौधरी ने उनसे काले कृषि कानून को वापस लेने की मांग की और श्योपुर में 6 महीने से हो रहे विरोध की जानकारी देते हुए एमएसपी गारंटी कानून लागू करने की बात कही।
केंद्रीय कृषि मंत्री के विरोध करने की किसानों की तैयारी है, यह जानकारी प्रशासन व पुलिस को मिल चुकी थी। ऐसे में पुलिस ने किसान नेता राधेश्याम मीणा उर्फ राधेश्याम मूंडला को बड़ौदा थाने में सुबह 11 से शाम 5 बजे तक नजरबंद रखा। वहीं किसान नेता जसवंत बछेरी को आवदा थाना पुलिस ने घर से उठाकर थाने में बैठा दिया और दिनभर नजरबंद रखा। इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन किसानों के प्रदर्शन को रोक नहीं सका।
मंत्री का घेराव व किसानों से बहस होते देख पुलिस व कलेक्टर राकेश कुमार श्रीवास्तव किसानों को खदेड़ने लगे। कलेक्टर खुद ही किसानों से धक्का-मुक्की करते हुए उन्हें भागने में जुट गए, इस बीच उनकी किसानों से झड़प भी हुई। पुलिस ने भी किसानों से धक्का-मुक्की करते हुए उन्हें लाठियों से पीटा और कई लोगों को पकड़कर अजाक थाने में बैठा दिया। करीब आधा घंटे तक केंद्रीय मंत्री को किसानों ने रोके रखा और कृषि कानूनों को लेकर उन्हें खरी-खोटी सुनाईं। केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर को किसानों का गुस्सा झेलना पड़ा। प्रदर्शन के बीच अनिल सिंह चौधरी ने मंत्री तोमर से कहा कि क्या कोविड के सभी प्रोटोकॉल सिर्फ किसान नेताओं के लिए हैं। जब हमारा नेता आता है तो लॉकडाउन कहकर बायपास से निकाला जाता है और आप पूरे शहर में बड़ा काफिला लेकर घूम रहे हो। किसान नेता ओमप्रकाश मीणा व अनिल सिंह ने कहा कि वे भाजपा को वोट करते हैं और आपको भी वोट दिए। अब हम आपसे सवाल क्यों नहीं पूछें। आपके पास हमारे लिए समय नहीं है। हमें समय क्यों नही दिया गया, अब हमें ही दोषी बताया जा रहा है और पुलिस धक्का-मुक्की कर रही है। इसके बाद जब तोमर कोई जवाब नहीं दे पाए तो किसानों ने उनके मुर्दाबाद के नारे लगाना शुरू कर दिए।
केंद्रीय मंत्री तोमर सोमवार की रात ही विजयपुर पहुंच गए थे। उन्होंने विजयपुर अस्पताल का निरीक्षण किया। इसके बाद वे वीरपुर होते हुए मंगलवार की दोपहर श्योपुर आए। यहां रेस्ट हाउस पर भाजपा नेताओं से चर्चा की। पूर्व नपाध्यक्ष दौलतराम गुप्ता व पूर्व विधायक बृजराज सिंह चौहान ने उन्हें बताया कि वर्तमान में राजस्थान की सीमा सील है और लोगों को इलाज के लिए भी नहीं जाने दिया जा रहा है। इस पर तोमर ने कहा कि राजस्थान सरकार से चर्चा करेंगे। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष महावीर सिंह ने कहा कि कुछ किसानों को गेहूं पहले रिजेक्ट हो गया था, जिसे बाद में पास कर दिया गया लेकिन अब 30 हजार क्विंटल गेहूं का भुगतान किसानों को नहीं हो पा रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि वह इसे लेकर बात करेंगे और जल्द भुगतान कराएंगे। इसके बाद तोमर जिला संकट प्रबंधन समूह की बैठक में शामिल हुए फिर दिशा की बैठक में हिस्सा लिया। यहां से वे कराहल पहुंचे और अस्पताल का निरीक्षण कर देर रात ग्वालियर के लिए रवाना हो गए।
किसानों से मिलने को हम तैयार हैं, हमने किसानों से 11 दौर की वार्ता की है और 130 करोड़ लोगों का यह देश इस बात का गवाह है। किसान जानबूझकर किसान के हित की बात नहीं करना चाहते हैं जिसका इलाज हमारे पास नहीं है। हमने बिंदुवार प्रस्ताव दिया, डेढ़ साल तक कानून स्थगित करके विचार करने का आग्रह किया। उनसे यह भी कहा कि वे अपना प्रस्ताव लेकर आएं, पर उनके पास कोई प्रस्ताव नहीं है। इसलिए किसानों से वार्ता नहीं हो पा रही है।
नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि मंत्री
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