रायसेन, शिव मंदिर भोजपुर में श्रावण मास के पहले सोमवर को लगी भक्तो की भीड़। - Ghatak Reporter

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Monday, July 26, 2021

रायसेन, शिव मंदिर भोजपुर में श्रावण मास के पहले सोमवर को लगी भक्तो की भीड़।

शिव मंदिर भोजपुर में श्रावण मास के पहले सोमवर को लगी भक्तो की भीड़।

रायसेन, शिव मंदिर भोजपुर में श्रावण मास के पहले सोमवर को लगी भक्तो की भीड़।

घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे, रायसेन।
रायसेन। सावन सोमवार के पहले सोमवार को विश्व प्रसिद्ध शिवलिंग मंदिर भोजपुर में भक्तो का ताँता लगा हुआ हैं। 10वीं सदी में राजा भोज ​के समय का विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग मंदिर हैं, जिसे भोजेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है, एशिया का सबसे बड़ा विशाल शिवलिंग मंदिर हैं। रायसेन जिले के भोजपुर का भोजेश्वर मंदिर 11वीं सदी से 13वीं सदी की मंदिर वास्तुकला का एक अद्वितीय उदाहरण है। अगर यह मंदिर पूर्णरूप से निर्मित होता तो पुराने भारत का अपनी तरह का एक आश्चर्य होता है। मंदिर का पूरी तरह भराहुआ नक्काशीदार गुम्बद और पत्थर की संरचनाएं, जटिल नक्काशी से तैयार किये गए प्रवेश द्वार और उनके दोनों तरफ उत्कृष्टता से गढ़ी गई आकृतियाँ देखने वालों का स्वागत करती हैं। मंदिर की बालकनियों को विशाल कोष्ठक और खंभों का सहारा दिया गया है। मंदिर की बाहरी दीवारों और ढाँचे को कभी बनाया ही नहीं गया। मंदिर को गुंबद के स्तर तक बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया मिट्टी का रैम्प अभी तक दिखाई पड़ता है, जो हमें इमारत निर्माण कला (चिनाई) में पुरातन बुद्धिमत्ता का स्वाद चखाता है।


भोजपुर, बलुआ पत्थर की रिज जो मध्य भारत की विशेषता है, पर स्थित 11वीं सदी का एक शहर है। यह मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। बेतवा नदी पुनः बनाए गए इस प्राचीन शहर के पास बहती है जो भोजपुर पर्यटन में पुरानी दुनिया के आकर्षण का समावेश करती है। यह शहर, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 28 किलोमीटर की मामूली सी दूरी पर स्थित है। यहाँ 11वीं शताब्दी की पर्याप्त बुद्धिमत्ता से निर्मित दो बाँधों वाली विस्मयकारी संरचना है, जो बेतवा नदी का रुख मोड़ने और पानी को रोकने के लिए भारी पत्थरों से बनाई गई थी, जिनसे एक झील का निर्माण हुआ था। भोजपुर का यह नाम परमार राजवंश के सबसे शानदार शासक राजा 'भोज' के नाम पर रखा गया था। उनके शासनकाल के तहत बिना तराशे हुए बड़े पत्थरों की इमारत बनाने की एक प्राचीन शैली द्वारा (विशाल चिनाई) द्वारा निर्मित यह बांध अवश्य देखे जाने वाले स्थानों में से एक है चाहे आप अचानक पहुँचने वाले पर्यटक हों या फिर वास्तुकला के पुजारी।

रायसेन, शिव मंदिर भोजपुर में श्रावण मास के पहले सोमवर को लगी भक्तो की भीड़।

भोजपुर और उसके आसपास के पर्यटक स्थल भोजेश्वर मंदिर को पूर्व के सोमनाथ के नाम से भी जाना जाता है जो भारत की उन अद्भुत संरचनाओं वाली इमारतों में से एक है, जिसे एक बार ज़रूर देखा जाना चाहिए। इस प्राचीन शहर के दैत्य जैसे बांधों के अवशेष आपको आश्चर्य में डाल देंगे। 'अधूरा' होने का तथ्य ही इस प्राचीन शहर को अनूठी गुणवत्ता प्रदान करता है, उन चट्टानी खदानों में जाना बहुत ही रोमांचकारी होता है जहाँ आप हाथ से तराशे गए पत्थर के मूर्ति शिल्प को देख सकते हैं जो कभी एक पूरे मंदिर या महल का रूप नहीं ले पाए। विदेशी भक्तो को यह मंदिर और कलाकृति मनमोह लेती हैं। हर दूसरे ऐतिहासिक पर्यटन स्थल पर आप प्राचीन शहर के खंडहरों का निरीक्षण कर सकते हैं पर यहाँ वास्तव में वो शहर है जो कभी पूरा ही नहीं किया गया। यहाँ भक्तो की कतार सुबह से लगी हुई हैं, मंदिर में देश दुनिया से भक्त आतें हैं और यहाँ आकर शिव भक्ति में लींन हो जातें है। हजारो की संख्या में भक्तो का ताता लगा हुआ हैं, यह एक ऐतिहासिक धरोहर के साथ धार्मिक प्रचीन धरोहर हैं।

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