भोपाल/शिवपुरी, कथित पत्रकार अजय आहूजा उर्फ अजय कुमार की ब्लैकमेलर गैंग के एक सदस्य ध्रुव शर्मा पर न्यायालय मुख्य न्यायिक मस्जिस्ट्रेड शिवपुरी मैं बहस के बाद आरोप तय, ट्रायल के बाद विभिन्न धाराओं मैं हो सकती है आजीवन कारावास की सजा। - Ghatak Reporter

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Saturday, January 29, 2022

भोपाल/शिवपुरी, कथित पत्रकार अजय आहूजा उर्फ अजय कुमार की ब्लैकमेलर गैंग के एक सदस्य ध्रुव शर्मा पर न्यायालय मुख्य न्यायिक मस्जिस्ट्रेड शिवपुरी मैं बहस के बाद आरोप तय, ट्रायल के बाद विभिन्न धाराओं मैं हो सकती है आजीवन कारावास की सजा।

शिवपुरी सिद्धिविनायक अस्पताल मामला

कथित पत्रकार ब्लैकमेलर गैंग के एक सदस्य ध्रुव शर्मा पर न्यायालय मुख्य न्यायिक मस्जिस्ट्रेड शिवपुरी मैं बहस के बाद आरोप तय, ट्रायल के बाद विभिन्न धाराओं मैं हो सकती है आजीवन कारावास की सजा।

  • गैंग का मुख्य सरगना अजय कुमार उर्फ अजय आहूजा पिता स्व. ओमप्रकाश निवासी दुर्गा चौक मण्डीदीप अभी भी फरार।
  • ब्लेकमेलर गैंग के पांच सदस्य 3 महीने से ज्यादा समय से अभी भी जेल में बंद,  ब्लेकमेलर गैंग के किसी भी सदस्य को नही मिली अभी तक जमानत। 
  • ब्लैकमेलर अजय कुमार उर्फ अजय आहूजा की गिरफ्तारी के बाद मण्डीदीप, भोपाल, उज्जैन, इंदौर के खुलासे की पूलिस को आशा।

भोपाल/शिवपुरी, कथित पत्रकार अजय आहूजा उर्फ अजय कुमार की ब्लैकमेलर गैंग के एक सदस्य ध्रुव शर्मा पर न्यायालय मुख्य न्यायिक मस्जिस्ट्रेड शिवपुरी मैं बहस के बाद आरोप तय, ट्रायल के बाद विभिन्न धाराओं मैं हो सकती है आजीवन कारावास की सजा।
ब्लैकमेलिंग के मामले में जैल में बंद आरोपी ध्रुव शर्मा, पर न्यायालय में आरोप तय

घातक रिपोर्टर, अरविंद सिंह जादौन, भोपाल।
9329393447/9009202060
शिवपुरी। कहते हैं पाप का घड़ा धीरे-धीरे भरता है और जब पाप का घड़ा भर जाता है तो फुटता भी है और उससे गिरने वाले पानी से या घड़े को फूटने से कोई नहीं बचा सकता, चाहे उसके सारथी सकुनी मामा जैसे ही क्यों न हो। यह ईश्वर की सांसारिक रचना मैं ईश्वरीय शक्तियों के अनुसार ही सारा कार्य होता है।
ब्लैकमेलर और षड्यंत्रकारी अजय कुमार उर्फ अजय आहूजा की हकीकत को हम पिछले एक वर्ष से ज्यादा समय से प्रकाशित कर रहे हैं। मगर कुछ अधिकारियों के संरक्षण व इसका बचाव करने वाली साथी गैंग व इसके ब्लैक मेलिंग के तरीके के कारण अभी तक यह प्रशासन की नजरों से बचता रहा है या यूं कहें प्रशासन के कुछ अधिकारी इसे बचाते रहे है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।
मगर कहते हैं आखिर बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी, उसी तर्ज पर ये शिवपुरी के सिद्धि विनायक हॉस्पिटल को ब्लैक मेलिंग के मामले में यह और इसकी गैंग के कुछ सदस्य अब कानून की जकड़ में आ चुके है। हालांकि अभी अजय कुमार उर्फ अजय आहूजा फरार चल रहा है। इसके गिरफ्तार होने के बाद इसकी ब्लैकमेलिंग की परतें और खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। सूत्रों की माने तो शिवपुरी पुलिस की नजर इसके अन्य साथियों पर भी है। वही पुलिस इसके साथियों व इसके द्वारा व इनके साथियों द्वारा कथित तौर पर ट्रेंड किये गए कथित स्ट्रिंग्गर, पत्रकार अब कहाँ है और उन्होंने अब तक कितने स्ट्रिंग किये और उन स्ट्रिंग को करने के बाद कहीं समाचारों का प्रकाशन किया या ब्लैकमेलिंग कर धन अर्जित किया। सूत्रों की माने तो इसके तार औद्योगिक नगरी मंडीदीप से लेकर मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में फैले हैं। इसके कई कथित स्ट्रिंगर व कथित पत्रकार जो इसके ब्लैकमेलिंग के गोरखधंधे में साथ देते रहे हैं। यह ब्लैकमेलर और इसकी गैंग बहुत ही शातिर तरीके से षडयंत्र पूर्वक अपने जाल में लोगों को फंसा लेती है। हालांकि यह शातिर झूठे मामलों मैं फसाने से लेकर हत्या करवाने, हाथ-पैर तुड़वाने तक के कार्य बखूबी करता है। इसकी गैंग केवल मध्य प्रदेश ही नहीं उत्तरांचल, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों में भी पैर पसार चुकी हैं। मिडिया रिपोर्टों के अनुसार इनमें से कई राज्यों में इसके साथियों पर अड़ीबाजी ( रंगदारी ) ब्लैक मेलिंग के मामले पहले से ही पंजीबद्ध है। वहीं कई मामलों मैं गैर जमानती वारंट तो कई मामलों मैं इसके साथियों की संपत्ति कुर्की के आदेश न्यायालय द्वारा दिये जा चुके हैं। वहीं सूत्रों की माने तो इसके कई साथी तो कई-कई महीने जेल में बिताने के आदि जैसे हो गए हैं।

भोपाल/शिवपुरी, कथित पत्रकार अजय आहूजा उर्फ अजय कुमार की ब्लैकमेलर गैंग के एक सदस्य ध्रुव शर्मा पर न्यायालय मुख्य न्यायिक मस्जिस्ट्रेड शिवपुरी मैं बहस के बाद आरोप तय, ट्रायल के बाद विभिन्न धाराओं मैं हो सकती है आजीवन कारावास की सजा।
प्रकरण में अभी तक फरार आरोपी अजय कुमार उर्फ अजय आहूजा

इस ब्लैकमेलर के कथित चेनल तहलका इंडिया डॉट कॉम व आई बी एन यूट्यूब चैनल भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय मैं कही भी रजिस्टर्ड नहीं है। केवल शोशल मीडिया, फेसबुक, यूट्यूब के माध्यम से ही ये ब्लैकमेलर ब्लैकमेलिंग के एम्पायर को चला रहे हैं एवं अपने आप को सीएमड़ी बताने वाला ये ब्लैकमेलर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर ही पीआरओ लेटर जारी कर अपने साथ कई लोगों को अपनी गैंग मैं सामिल कर लेता है। अभी सितम्बर 2021 मैं इस कथित पत्रकार ब्लैकमेलर अजय कुमार उर्फ अजय आहूजा व इसके साथियों पर एक हॉस्पिटल मैं कथित भ्रूण हत्या का कथित स्ट्रिंग कर ब्लैकमेलिंग करने का प्रयास किया था, जिसमे ये सफल नहीं हो पाए। बल्कि ब्लैकमेलिंग के मामले में अजय कुमार उर्फ अजय आहूजा व इसके साथी खुद कानून के शिकंजे मैं उलझ गए। हालांकि ये ब्लैकमेलर वीडियो-फोटो के साथ छेड़खानी (टेम्पर्ड) कर अपने हिसाब से बना लेने मैं माहिर हैं इसलिए अस्पताल के कथित वीडियो की पुष्टि नहीं की जा सकती की कथित स्ट्रिंग का वीडियो असली है या नकली। हालांकि अस्पताल के विरुद्ध मामला पंजीबद्ध होने के बाद ही ब्लैकमेलिग का मामला सामने आया था। जब इनके साथियों के द्वारा वीडियो शोशल मीडिया के माध्यम से सितंबर के प्रथम सप्ताह मैं वायरल किया था, वीडियो को वायरल करने के पहले ये गैंग कथित विडियो को दिखाकर अस्पताल प्रबंधन को ब्लैकमेल कर रहे थे, जबकि अस्पताल प्रबंधन के द्वारा 20 अगस्त को ही ब्लैकमेलिंग करने का आवेदन शिवपुरी कोतवाली मैं दे दिया गया था। इस बीच ये गैंग अस्पताल प्रबंधन को निरंतर ब्लैकमेलिंग करती रही थी। ब्लैकमेलिग मैं सफल नही होने पर कथित विडियो को शोशल मीडिया पर वायरल किया था, जबकि कथित भ्रूण हत्या के समाचार का प्रकाशन कहीं से भी नहीं किया गया।


इस ब्लैकमेलिग के मामले मे ब्लैकमेलिंग गैंग के 5 सदस्य अभी तक जेल की हवा खा रहे हैं। जबकि असप्ताल की एक नर्स सुनीता पाल को न्यायलय से जमानत मिल चुकी है। वहीं अजय कुमार उर्फ अजय आहूजा अभी भी फरार है, जबकि शिवपुरी पुलिस अधीक्षक इसकी व इसके एक साथी ध्रुव शर्मा की गिरफ्तारी पर भी 2-2 हजार का इनाम 21 सितंबर को घोषित किया गया था। जिसमें ध्रुव शर्मा ने इनाम घोषित होने के 48 घंटे मैं आत्मसमपर्ण कर दिया था। जिस पर न्यायालय मुख्य न्यायिक शिवपुरी मैं बहस के बाद आरोप तय किये गए है। जिनमे धारा 420 सात वर्ष तक की सजा, 419 तीन वर्ष तक की सजा, 389 मृत्यु दंड से लेकर आजीवन कारावास, 467 दस वर्ष तक की सजा से लेकर आजीवन कारावास, 468 सात वर्ष सहित जुर्माना, 471, 120B तीन साल तक की सजाओं का प्रावधान है। हालाकि न्यायालय मैं ट्रायल चलने पर सिद्ध होने की दशा में ही सजा हो सकती है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि अपराध की गम्भीरता को देखते हुए गिरफ्तारी के 3 महीने से ज्यादा बीत जाने के बाद भी एक भी आरोपी को माननीय उच्च न्यायालय ग्वालियर तक से जमानत की राहत नहीं पायी है।

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