रायसेन/बरेली, वाल्मीकि ने रामायण में भगवान राम को मनुष्य बताया है - कथावाचक ब्रह्मचारी जी। - Ghatak Reporter

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Monday, April 4, 2022

रायसेन/बरेली, वाल्मीकि ने रामायण में भगवान राम को मनुष्य बताया है - कथावाचक ब्रह्मचारी जी।

वाल्मीकि ने रामायण में भगवान राम को मनुष्य बताया है - कथावाचक ब्रह्मचारी जी।

रायसेन/बरेली, वाल्मीकि ने रामायण में भगवान राम को मनुष्य बताया है - कथावाचक ब्रह्मचारी जी।

घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे, रायसेन/बरेली।
बरेली। छीद मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्री राम महायज्ञ एवं श्रीमद् बाल्मीकि रामायण कथा के तृतीय दिवस कथा वाचक ब्रह्मचारी जी ने पांडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए बताया कि रामायण और रामचरित मानस हमारे पवित्र ग्रंथ हैं। तुलसीदास जी ने श्री राम को ईश्वर मान कर रामचरितमानस की रचना की है किन्तु आदिकवि वाल्मीकि ने अपने रामायण में श्री राम को मनुष्य ही माना है।


तुलसीदास जी ने रामचरितमानस को राम के राज्यभिषेक के बाद समाप्त कर दिया है। वहीं आदिकवि श्री वाल्मीकि ने अपने रामायण में कथा को आगे श्री राम के महाप्रयाण तक वर्णित किया है। ब्रह्मचारी जी बताते हैं कि महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति हेतु यज्ञ आरंभ करने की ठानी। महाराज की आज्ञानुसार श्यामकर्ण घोड़ा चतुरंगिनी सेना के साथ छुड़वा दिया गया। महाराज दशरथ ने समस्त मनस्वी, तपस्वी, विद्वान ऋषि-मुनियों तथा वेदविज्ञ प्रकाण्ड पण्डितों को यज्ञ सम्पन्न कराने के लिये बुलावा भेज दिया।


निश्‍चित समय आने पर समस्त अभ्यागतों के साथ महाराज दशरथ अपने गुरु वशिष्ठ जी तथा अपने परम मित्र अंग देश के अधिपति लोभपाद के जामाता ऋंग ऋषि को लेकर यज्ञ मण्डप में पधारे। इस प्रकार महान यज्ञ का विधिवत शुभारंभ किया गया। सम्पूर्ण वातावरण वेदों की ऋचाओं के उच्च स्वर में पाठ से गूंजने तथा समिधा की सुगन्ध से महकने लगा। वाल्मीकि रामायण को आगे बढ़ाते हुए ब्रह्मचारी ब्रह्मचारी जी कहते हैं कि समस्त पण्डितों, ब्राह्मणों, ऋषियों आदि को यथोचित धन-धान्य, गौ आदि भेंट कर के सादर विदा करने के साथ यज्ञ की समाप्ति हुई।


राजा दशरथ ने यज्ञ के प्रसाद चरा (खीर) को अपने महल में ले जाकर अपनी तीनों रानियों में वितरित कर दिया। प्रसाद ग्रहण करने के परिणामस्वरूप तीनों रानियों ने गर्भधारण किया। कथा के अंत में कथा वाचक ब्रह्मचारी जी मंदिर प्रांगण में चल रहे श्रीराम महायज्ञ पहुंचे, जहां पर मंदिर अध्यक्ष कृष्ण कुमार रघुवंशी के साथ उन्होंने पूजन अर्चना की।

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