रायसेन, जानिए सूर्य ग्रहण के बाद भी कैसे और कब मनाई दिवाली, सूतक के चलते देवी-देवताओं के मंदिरों के पट रहे बंद। - Ghatak Reporter

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Tuesday, October 25, 2022

रायसेन, जानिए सूर्य ग्रहण के बाद भी कैसे और कब मनाई दिवाली, सूतक के चलते देवी-देवताओं के मंदिरों के पट रहे बंद।

जानिए सूर्य ग्रहण के बाद भी कैसे और कब मनाई दिवाली, सूतक के चलते देवी-देवताओं के मंदिरों के पट रहे बंद।

रायसेन, जानिए सूर्य ग्रहण के बाद भी कैसे और कब मनाई दिवाली, सूतक के चलते देवी-देवताओं के मंदिरों के पट रहे बंद।

घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे, रायसेन।
रायसेन। प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष माह की अमावस्या को दीपावली का पर्व मनाया जाता है। लेकिन इस बार अमावस्या पर सूर्य ग्रहण की छाया रही। ग्रहण काल में कोई भी त्योहार या मांगलिक कार्य नहीं करते हैं। ऐसे में दीपावली का पर्व कब से कब तक मनाया गया? जानिए ज्योतिषाचार्य पण्डित ओमप्रकाश शुक्लाजी सौजना वाले से...

ग्रहण का समय

सूर्य ग्रहण का समय 25 अक्टूबर मंगलवार को शाम 4.29 मिनट पर शुरू होकर शाम 5.42 मिनट पर समाप्त हुआ। सूर्यग्रहण के पहले और बाद तक सूतक काल रहता है। सूर्य ग्रहण भारत के साथ-साथ विश्व के कई देशों में दिखाई पडा। इसका प्रभाव भारत देश में बेहद आंशिक रहा।

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दीपावली अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार

यह दीपों व रोशनी का प्रकाश महापर्व 24 अक्टूबर सोमवार को उत्साह व धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दिन प्रदोष वियापनी अमावस्या रही और 25 अक्टूबर मंगलवार को सूर्य ग्रहण पड़ा। पंचांग भेद से 25 अक्टूबर मंगलवार को भी अमावस्या रही। परंतु दीपावली रात्रि कालीन पूजा है और 24 अक्टूबर को शाम को अमावस्या तिथि प्रारंभ हो जावेगी। जिसके कारण 24 अक्टूबर को ही पूरे भारत देश में दीपावली मनाई गई। शुभ मुहूर्त में धन वैभव सुख संपदा की महालक्ष्मी की पूजन लोगों ने पूरे विधि विधान से की। दरअसल, 24 अक्टूबर को चतुर्दशी तिथि शाम 5.29.35 बजे तक रही। इसके बाद सोमवार अमावस्या प्रारंभ हो गई थी जो अगले दिन 25 अक्टूबर मंगलवार तक रही। इसीलिए 24 अक्टूबर सोमवार को पूरी रात दीपावली का पर्व मनाया गया। दीपावली पर्व की पूजा आरती अमावस्या तिथि की रात में ही होती है। यह रात्रि कालीन पूजा है और 25 अक्टूबर मंगलवार की रात को यह तिथि नहीं रही। यानी 24 अक्टूबर सोमवार को शाम 5.29.35 से दीपावली का पर्व मनाया गया।

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पूजन के विशेष मूहर्त इस प्रकार रहे

पण्डित शुक्ला के अनुसार परदोष बेला शाम 6 बजे से 8.32 बजे तक, विर्षव लगन 7.14 से 9.11 तक एवं सिंह लगन मध्य रात्रि 1.42 से 3.57 तक महालक्ष्मी की पूजा की गई। अगले दिन मंगलवार 25 अक्टूबर को ग्रहण मोक्ष होने से पहले सूर्यास्त रहा। ग्रस्तास्त रहा। यह दूषित काल माना गया। इसकी सूतक 12 घंटे पूर्व 25 तारीख मंगलवार को अलसुबह को 4.31 से प्रारंभ होगी जिसके दूसरे दिन सूर्योदय के बाद शुद्धि होती है। सूर्यग्रहण के चलते मंगलवार को सुबह से ही सूतक रहा। इस कारण रायसेन शहर सहित जिलेभर के देवी-देवताओं के मंदिरों में रोजाना की तरह पूजन आरती नहीं हुई। बल्कि मन्दिरों के पट बंद रहे। शाम को सूर्यग्रहण का सूतक काल की वजह से शाम साढ़े 6 के बाद शाम 7 बजे पूजन आरती दर्शन हुए। साथ ही गरीबों, यतीमों, याचकों को दान दक्षिणा दी।

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