रायसेन, सांची बौद्ध महोत्सव में शामिल हुए देश-विदेश के बौद्ध अनुयायी, 2 ताले खोलकर तहखाने से निकाले गौतम बुद्ध के परम शिष्यों के अस्थिकलश। - Ghatak Reporter

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Sunday, November 27, 2022

रायसेन, सांची बौद्ध महोत्सव में शामिल हुए देश-विदेश के बौद्ध अनुयायी, 2 ताले खोलकर तहखाने से निकाले गौतम बुद्ध के परम शिष्यों के अस्थिकलश।

सांची बौद्ध महोत्सव में शामिल हुए देश-विदेश के बौद्ध अनुयायी, 2 ताले खोलकर तहखाने से निकाले गौतम बुद्ध के परम शिष्यों के अस्थिकलश।

रायसेन, सांची बौद्ध महोत्सव में शामिल हुए देश-विदेश के बौद्ध अनुयायी, 2 ताले खोलकर तहखाने से निकाले गौतम बुद्ध के परम शिष्यों के अस्थिकलश।

घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे, रायसेन।
रायसेन। विश्व धरोहर सांची में शनिवार रविवार को 2 दिवसीय सांची बौद्ध महोत्सव सुबह 7 बजे भगवान बुद्ध के शिष्य सारिपुत्र तथा महामुगल्यान के अस्थिकलशों की पूजन के साथ शुरू हुआ। सूर्यउदय के बाद 7.30 बजे 6 बाय 6 के कमरे में से पवित्र अस्थि कलश को प्रशासनिक और महाबोधि सोसाइटी के सदस्यों की मौजूदगी में दो ताले खोलकर बाहर निकाला गया। वहीं, महाबोधि सोसाइटी के धर्मगुरु द्वारा पूरे विधि विधान से इनकी पूजा-अर्चना की प्रक्रिया शुरू की गई। जिसके बाद वियतनाम, जापान, श्रीलंका से आए बौद्ध धर्म को मानने वाले अनुयायियों और बौद्ध भिक्षुओं द्वारा आरती हवन पूजा अर्चना की गई। रविवार को अवकाश होने की वजह से मेला देखने के लिए रायसेन, भोपाल, विदिशा, सीहोर, सागर, होशंगाबाद आदि जिलों के लोग परिवार सहित ऐतिहासिक सांची स्तूप पहाड़ी पर घूमने मेला देखने पहुंचे। इस अवसर पर सबसे पहले चीन, जापान, श्रीलंका, नेपाल, भूटान से आए बौद्ध धर्म अनुयायियों ने भगवान बुद्ध के मंदिरों की परिक्रमा की। 80 किलो वजनी क्रिस्टल बॉक्स में गौतम बुद्ध के परम शिष्य बोद्ध भिक्षु सारिपुत्र और महामोद ग्लायन की अस्थियां दर्शनार्थ रखी गईं। पूजन दर्शन के लिए रविवार को सुबह से शाम तक तांता सा लगा रहा।

विदेशों से अए बौद्ध अनुयायी शामिल हुए

सांची स्तूप पहाड़ी पर 2 दिवसीय सांची महोत्सव में बड़ी संख्या में विभिन्न देशों से अए बौद्ध अनुयायी शामिल हो रहे हैं। ​​​​​​​सांची महोत्सव में सबसे खास होता है, इन 2 दिनों में भगवान बुद्ध के 2 परम शिष्य, सारीपुत्र और महामोदरलायन के अस्थि कलशों के देश और दुनिया से आए 2 दिन दर्शन कर पाते हैं। इन दिनों के अलावा पूरे साल अस्थि कलश चेतयागिरी बिहार के गर्भगृह में साल भर बंद रखे जाते हैं। इतना ही नहीं अस्थि कलशों को पूजन दर्शन के लिए निकाले जाने में एक तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है। चैत्यागिरी मन्दिर के गर्भगृह तक पहुंचने के दो जगह के ताले खोलकर यहां रखे रजिस्टर पर पंचनामा बनाया जाता है और हस्ताक्षर कराए जाते हैं। इस पंचनामा में लिखा जाता है सांची महोत्सव  को लेकर अस्थिकलश इन लोगों की मौजूदगी में निकाले जाते हैं। वहीं सूर्यास्त के पहले इन कलशों को वापस चेत्यागिरी विहार के गर्भगृह में इससे प्रक्रिया को दोहराते हुए रख लिए जाते हैं। शनिवार को इसी तरह से अगले दिन रविवार को भी इस प्रक्रिया को दोहराया ।रविवार को मुख्य समारोह में  प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी, जिपं अध्यक्ष यशवंत बब्लू मीणा नगर परिषद सांची के अध्यक्ष रेवाराम पप्पू अहिरवार, जनपद पंचायत सांची की अध्यक्ष अर्चना सुनील पोर्ते, कलेक्टर अरविंद दुबे एसपी विकाश कुमार शाहवाल, एसडीएम एलके खरे, तहसीलदार अजय प्रताप सिंह पटेल रायसेन, सांची तहसीलदार नियति साहू जगदीश अहिरवार आदि शामिल हुए।

दो चाबियों से खुला ताला

चैत्यागिरी बिहार के गर्भगृह के ताले न तो अकेला प्रशासन खोल सकता और न ही श्रीलंका महाबोधी सोसायटी। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों के पास एक-एक चाबी होती है। यहां दो जगहों पर लगे तालों को खोले जाने के लिए दोनो चाबियों की जरूरत होती है। इसलिए दो पक्षों के जिम्मेदार पदाधिकारी को मौजूदगी में ही गर्भगृह के ताले खोलकर पवित्र अस्थि कलश निकाले और वापस रखे जाते हैं। इससे कलशों की सुरक्षा में कोई सेंध लगा सके।

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