मेहमान पक्षियों का आना शुरू, चंबल किनारे कर रहे कलरव, दूर-दूर से देखने आते हैं पर्यटक। - Ghatak Reporter

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Tuesday, November 29, 2022

मेहमान पक्षियों का आना शुरू, चंबल किनारे कर रहे कलरव, दूर-दूर से देखने आते हैं पर्यटक।

मेहमान पक्षियों का आना शुरू, चंबल किनारे कर रहे कलरव, दूर-दूर से देखने आते हैं पर्यटक।

मेहमान पक्षियों का आना शुरू, चंबल किनारे कर रहे कलरव, दूर-दूर से देखने आते हैं पर्यटक।

घातक रिपोर्टर, शिवेंद्र सिंह सेंगर, उत्तर प्रदेश।
औरैया। तहसील क्षेत्र से लेकर आगरा के पचनद तक फैली चम्बल सेन्चुरी इलाके में सर्दी के सीजन में प्रवासी पक्षियों अपना डेरा जमा लेते हैं। चम्बल की सुन्दता को चार चांद लगा देते हैं। इस वर्ष देर सर्दी शुरू होने के कारण कुछ प्रजातियां अभी नहीं आ सकी हैं, लेकिन जो पक्षी आ गए हैं। उन्होंने प्रजनन के लिए घोसलें भी बना दिए गए हैं। इन पक्षियों को देखने लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। इस क्षेत्र में पर्यटक जनवरी से आना शुरू हो जाते है। सबसे ज्यादा इनकी संख्या यमुना व चम्बल के संगम पर देखने को मिलती है। चंबल फाउंडेशन के अध्यक्ष शाह आलम ने बताया कि चंबल सेंचुरी में प्रवासी पक्षी करीब 3 माह तक यहां डेरा जमाए रहते हैं और यहां पर अपने बच्चों को जन्म देने के उपरांत वह उनके साथ अपने देश वापस लौट जाते हैं। यहां खास बात है यहां कई प्रकार के पक्षियों का सर्दी में डेरा बना रहता है और यह चंबल के आसपास कलरव करते हुए दिखाई देते हैं। बीहड़ी क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इन पक्षियों की जब आवक शुरू हो जाती है तो यहां पर पर्यटक भी भारी मात्रा में इन पक्षियों की तस्वीर आदि को लेने के लिए आते हैं। फिलहाल मौसम इन पक्षियों के आने का शुरू हो गया है। कुछ विदेशी मेहमान यहां पर आ चुके हैं और कुछ आने की शीघ्र संभावना जताई जा रही है। चंबल क्षेत्र इटावा रेंजर हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि जनवरी में प्रवासी पक्षियों की संख्या में और इजाफा होगा। ठंडे देशो से भारत के विभिन्न हिस्सों पक्षी चम्बल और यमुना में जल विहार करते है। मध्य एशिया के ठंडे देशो में जब हिमपात होने लगता है, तब यह पक्षी हजारो किलोमीटर का लंबा सफर तय करके यह पहुंचते है। सर्दी खत्म होने के बाद परदेशी मेहमान अपने वतन को वापस लौट जाते है। इनमें प्रमुख प्रवासी पक्षी पेलिकाल, बरहेडिल, स्पूनबिल, पिगटल, कामेटिंक, शोबिल्क, कोभ, क्रेन, डेमेसिल क्रेन, तर्नरफ सेंट पाईप, मोमेंजर, पापलर, गोजनिर, कोमन पिचई, लेटर एच टुडेन्ट आदि हैं। पर्यावरणविद हरेन्द्र राठौर का कहना है कि विदेशी पक्षियों का शिकार करने के लिए कई शिकारी यहां पर आते हैं और इन पक्षियों का शिकार करते हैं। जिससे अब कुछ विदेशी मेहमान यहां पर आना छोड़ गए हैं। लोगों का कहना है कि इन शिकारियों से पक्षियों का बचाव किया जाए तो दोबारा से मेहमान पक्षी यहां पर आना प्रारंभ हो जाएंगे।वीरेंद्र सिंह सेंगर का कहना है कि पंचनद क्षेत्र में पांच नदियों का संगम है। यहाँ प्रतिवर्ष हजारों विदेशी पक्षी आते हैं। इस वर्ष भी पक्षियों का धीरे-धीरे आना शुरू हो गया है। प्रशासन को चाहिये पंचनद क्षेत्र को पर्यटन के रूप में विकसित करना चाहिए। राकेश बाबू का कहना है, पंचनद क्षेत्र की नदियां में विदेशी पक्षी हर वर्ष आकर अठखेलियाँ करते है। इन पक्षियों को देखने के लिये बहुत दूर दूर से लोग आते है। लोगो को यहाँ चंबल नदी डॉल्फिन, घड़ियाल आसानी से देखने को मिल जाते हैं।

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