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Tuesday, November 22, 2022
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रायसेन, जन्म के कुछ घंटे बाद ही खेत के पानी में नवजात को फेंका, ठंड से अकड़ी बॉडी।
रायसेन, जन्म के कुछ घंटे बाद ही खेत के पानी में नवजात को फेंका, ठंड से अकड़ी बॉडी।
घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे, रायसेन।
रायसेन। जाको राखे साइयां मार सके न कोई..., यह कहावत रायसेन में सच हो गई। जन्म के कुछ घंटे बाद ही नवजात बच्ची को कड़कडाती ठंड में काेई खेत में फेंक गया। बच्ची गेहूं के खेत में पानी के बीच पड़ी थी। सुबह खेत पहुंचे सरपंच रामकुमार यादव ने बच्ची को पड़ा देख डॉयल 100 को सूचना दी। ठंड से कांप रही बच्ची की जान बचाने के लिए डॉयल 100 के ड्राइवर ने 9 मिनट में 15 किमी का सफर तय कर बच्ची को रायसेन जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टर का कहना है कि 8 से 18 घंटे पहले बच्ची का जन्म हुआ है। मामला रायसेन थाना कोतवाली के निहालपुर गांव का है। रबी सीजन होने के चलते इन दिनों खेत में सिंचाई के लिए पानी छोड़ने का काम जारी है। गांव के सरपंच रामकुमार यादव के खेत पर भी सिंचाई की जा रही है, वे सुबह खेत पहुंचे तो देखा कि एक शिशु खेत में पड़ा है। उसे जहां फेंका गया था, वह हिस्सा काफी गीला था। बच्ची का शरीर ठंडा पड़ चुका था। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना डॉयल 100 को दी। साथ ही बच्ची को उठाकर अपने गमछे से लपेट लिया। सूचना मिलते ही कॉन्स्टेबल संजय श्रीवास्तव, पायलट रोहित ठाकुर और कपिल सक्सेना खेत पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि बच्ची की हालत बहुत खराब है। उसकी सांसें चलती देख उस एक और गरम कपड़े से लपेटा और उसे लेकर गाड़ी में बैठ गए। पायलट रोहित ठाकुर ने स्टेयरिंग संभाली और तेजी से रायसेन जिला अस्पताल पहुंचे। रोहित ने 9 मिनट में 15 किलोमीटर का सफर तय किया। बच्ची को यहां ऑब्जर्वेशन में लिया गया। कड़कती ठंड और पानी में पड़े होने से उसे हाइपोथर्मिया हो गया, इस कारण डॉक्टरों ने गर्म भांप देना शुरू किया।
नवजात बच्ची के खेत में पड़े होने की सूचना डॉयल 100 को सुबह 7 बजे मिली थी। हमने बिना देर किए निहालपुर गांव पहुंचे। 2 किलोमीटर का कच्चा रास्ता होने से गाड़ी तेजी से चलाने में दिक्कत हो रही थी। हम जैसे-तैसे मौके पर पहुंचे। बच्ची खेत में पानी और घास के बीच मिली थी। उसके शरीर पर खून लगा था। ऐसा लग रहा था कि बच्ची का जन्म 5 से 6 घंटे के बीच हुआ होगा।
हेड कॉन्स्टेबल संजय श्रीवास्तव
नवजात बच्ची को डॉयल 100 की मदद से जिला अस्पताल लाया गया था। जन्म के कुछ देर बाद ही बच्ची को गीली जगह पर फेंक दिया गया था। इस कारण उसे हाइपोथर्मिया बीमारी हो गई। उसकी सांसें तो चल रही थी, लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही थी। अस्पताल में पहुंचते ही उसका इलाज शुरू किया गया। सबसे पहले उसे भांप देना शुरू किया। नर्स ने नली के माध्यम से उसे सांसें दी, ऐसा कर बच्ची की जान बचाई गई। अब उसकी हालत में सुधार है, उसे जिला अस्पताल के एसएनसीयू में रखा गया है।
डॉक्टर अनिल ओढ़
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