रायसेन/बरेली, श्रीराम की सीख : जरूरी नहीं है कि हर काम हमारी मर्जी के मुताबिक ही हो, कभी-कभी मुश्किलें बढ़ जाती हैं - अनिरुद्ध आचार्य महाराज। - Ghatak Reporter

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Saturday, May 27, 2023

रायसेन/बरेली, श्रीराम की सीख : जरूरी नहीं है कि हर काम हमारी मर्जी के मुताबिक ही हो, कभी-कभी मुश्किलें बढ़ जाती हैं - अनिरुद्ध आचार्य महाराज।

श्रीराम की सीख : जरूरी नहीं है कि हर काम हमारी मर्जी के मुताबिक ही हो, कभी-कभी मुश्किलें बढ़ जाती हैं - अनिरुद्ध आचार्य महाराज।

रायसेन/बरेली, श्रीराम की सीख : जरूरी नहीं है कि हर काम हमारी मर्जी के मुताबिक ही हो, कभी-कभी मुश्किलें बढ़ जाती हैं - अनिरुद्ध आचार्य महाराज।

घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे, रायसेन/बरेली।
बरेली। छिंद धाम प्रांगण में आयोजित श्री राम कथा के चौथे दिवस कथा व्यास अनिरुद्ध आचार्य महाराज पंडाल में बैठे हजारों हजार श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए समाज से जुड़ी कुछ बातें बताते हैं, साथ ही राम कथा का सार भी बताते हैं। वह कहते हैं कि काम के शुरुआत में हमारी इच्छा होती है कि हमें बिना बाधा के सफलता मिल जाए, लेकिन ऐसा बहुत कम होता है। काम करेंगे तो बाधाएं भी आएंगी, कभी-कभी बहुत ज्यादा मुश्किलें बढ़ जाती हैं, बार-बार असफलताएं मिलने लगती हैं। ऐसी स्थिति में कुछ लोग निराश होकर अपना लक्ष्य ही बदल लेते हैं। हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए और जो बदलाव हो रहे हैं, उन्हें सकारात्मकता के साथ अपनाना चाहिए। हम ये बातें श्रीराम से सीख सकते हैं। कथा व्यास कहते हैं कि रामायण में श्रीराम के राज्याभिषेक से जुड़ी सारी तैयारियां हो गई थीं। अयोध्या के लोग बहुत खुश थे कि राम राजा बनेंगे। श्रीराम को भी ये बात मालूम हो गई थी। सारी बातें अनुकूल थीं, लेकिन राज्याभिषेक से ठीक पहले रात में कैकयी मंथरा की बातों में उलझ गईं। मंथरा ने कैकयी को श्रीराम के खिलाफ ऐसा भड़काया कि वे कोप भवन में जाकर बैठ गईं। राजा दशरथ को जब ये मालूम हुआ तो वे तुरंत कोप भवन में पहुंचे। उस समय कैकयी ने राजा दशरथ से अपने दो वर मांग लिए।

रायसेन/बरेली, श्रीराम की सीख : जरूरी नहीं है कि हर काम हमारी मर्जी के मुताबिक ही हो, कभी-कभी मुश्किलें बढ़ जाती हैं - अनिरुद्ध आचार्य महाराज।

पहला, भरत को राज्य और दूसरा, राम को 14 वर्षों का वनवास। राजा दशरथ ने कैकयी को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कैकयी अपनी बात पर टिकी रहीं। हार कर राजा दशरथ ने ये बात श्रीराम को बताई। श्रीराम ने पूरी बात ध्यान से सुनी और अपने पिता के वचनों को पूरा करने के लिए तैयार हो गए। जिस समय श्रीराम का राज्याभिषेक होना था, उसी समय राम को वनवास जाना पड़ा, लेकिन वे इस बात से भी निराश नहीं हुए थे। उन्होंने धैर्य रखा और सकारात्मक सोच के साथ इस बदलाव को स्वीकार किया।

श्रीराम की सीख
इस प्रसंग में श्रीराम ने संदेश दिया है कि समय कभी भी बदल सकता है, इसलिए हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसा जरूरी नहीं है कि हर काम हमारी मर्जी के हिसाब से ही हो। अगर हालात हमारे लिए सही नहीं हैं तो धैर्य रखें और सकारात्मक सोच के साथ बदलाव को स्वीकार करें, तभी जीवन में सुख-शांति रह सकती है।

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