ओशो की जन्मस्थली कुचवाड़ा पहुंचे मुरारी बापू।
घातक रिपोर्टर - राकेश दुबे
बरेली।
प्रसिद्ध कथावाचक मुरारी बापू शुक्रवार दोपहर में जिले में स्थित ओशो की जन्मस्थली कुचवाड़ा पहुंचे। वे जबलपुर में आज 6 दिसंबर से आयोजित होने वाली रामकथा के लिए जाते समय यहां रुके। उक्त रामकथा ओशो के 94 वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है। बापू ने ओशो की जन्मस्थली पर करीब 45 मिनट बिताए। उन्होंने ओशो की तस्वीर के सामने दीप जलाए। इस दौरान उन्होंने ओशो के दर्शन और सनातन धर्म पर अपने विचार व्यक्त किए। ओशो के अनुयायियों के अनुसार, मुरारी बापू ने ओशो को चरम आध्यात्मिक चेतना बताया। उन्होंने ओशो शब्द का अर्थ ओरिजिनल साइलेंट, हैप्पीनेस, ओरिजिनल' समझाया।
इस अवसर पर जापान, नेपाल, जबलपुर, भोपाल और रायसेन सहित दूर-दराज से आए कई ओशो अनुयायी उपस्थित रहे। मीडिया से बात करते हुए कई अनुयायी भावुक हो गए। जबलपुर के भेड़ाघाट से आए स्वामी श्रीला प्रेम पारस ने मुरारी बापू की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के कई साधु-संत और कथावाचक रात में ओशो को पढ़ते हैं, लेकिन सुबह उनकी बात नहीं करते। मुरारी बापू ने ओशो के जन्मोत्सव पर रामकथा करने का निर्णय लेकर एक नई पहल की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एक दिन पूरा देश ओशोमय होगा। उल्लेखनीय है कि ओशो की जन्मस्थली कुचवाड़ा में हर साल 11 दिसंबर को उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है। पूर्व अभिनेता विनोद खन्ना सहित कई हस्तियां पहले भी इस स्थान का दौरा कर चुकी हैं। आज भी देश में लाखों ओशो अनुयायी हैं, जो समय-समय पर यहां शिविर लगाकर दर्शन और ध्यान का ज्ञान प्राप्त करते हैं।



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