संघ शताब्दी वर्ष पर नगर में विराट हिंदू सम्मेलन, हजारों की संख्या में सनातनी हुए शामिल
- बच्चों को शस्त्र और शास्त्र दोनों का ज्ञान होने चाहिए -- प्रज्ञा भारती
- समस्त समाजों की रही सहभागिता , मंत्री पटेल हुए शामिल।
राकेश दुबे- घातक रिपोर्टर
बरेली । नगर में 4 जनवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नगर सहित क्षेत्र के गांवों से आए लगभग 10 हजार से अधिक सनातनी बंधुओं की सहभागिता रही। कार्यक्रम में धर्म, संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के विषयों पर वक्ताओं ने ओजस्वी विचार रखे। इस दौरान क्षेत्र के संत महंत और साध्वी जिसमें सुश्री प्रज्ञा भारती , ,महामंडलेश्वर गिरीशदास जी, फलाहारी बाबा, त्यागी जी, समनापुर वाले बड़े भैया , चंद्रकांत जी शास्त्री
सहित विद्वतजनों के द्वारा हिंदू समाज को दिशा देने के लिए धर्म उपदेश दिए गए। इस दौरान मचासीन रहे पिक्कू चौरसिया, आशीष जैन, डॉ राधेश्याम धाकड़ , केशव राठी, जगदीश श्रीवास्तव, शिखर चंद जैन, गोपाल सिंह दीखत। वहीं आयोजित हिंदूसमलन में समस्त व्यवस्थाओं में विजय प्रकाश तिवारी , अनिल जैन , अमन जैन , समर राजपूत , अवनीश पालीवाल विशेष भूमिका रही।
इस दौरान साध्वी प्रज्ञा भारती ने मातृ शक्ति से कुटुंब प्रबोधन का आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों को मोबाइल की बुरी लत से दूर रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शस्त्र और शास्त्र दोनों का ज्ञान होना चाहिए तथा ऐसे संस्कार दिए जाएं कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसे महापुरुषों से प्रेरणा लें। वहीं उन्होंने कहा कि हम सनातनियों को अपने धर्म के हिसाब से अपनी कर्म पर ध्यान देना चाहिए वहीं उन्होंने अन्न के ग्रहण करने को लेकर कहा कि आज हम अपनी पुरानी परंपराओं को भूल रहे हैं। हम सनातनी किसी भी चीज का भोग करते हैं ना कि भक्षण इसलिए खाना नहीं भोजन ग्रहण करने के समय भोजन शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए ।
- बच्चों को शस्त्र और शास्त्र दोनों का ज्ञान होने चाहिए -- प्रज्ञा भारती
साथ ही साध्वी जी ने पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण से बचते हुए भारतीय परंपरा और संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के समय जिस प्रकार पूरे विश्व में हर्ष और उल्लास का वातावरण बना, वैसा ही वातावरण पुनः निर्मित करना होगा, ताकि देश में गौ माता के वध पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे विषयों पर निर्णायक संकल्प लिया जा सके। उन्होंने कहा कि एक हमारा देश है जहां हम तुलसी के वृक्ष और नदियों को मां का दर्जा देते हैं। लेकिन ऐसा अन्य किसी और देश में देखने को नहीं मिलता है।
वहीं मुख्य वक्ता के रूप में
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हेमंत सेठिया ने कहा कि भारतीय समाज में एकता, सद्भावना एवं समरसता का भाव मजबूत करना एवं भारतीय नागरिकों के बीच सनातन संस्कृति के संस्कारों के अनुपालन को बढ़ावा देना भी शामिल हैं। भारतवर्ष में धर्म का अनुसरण करते हुए, अपने जीवन में प्रत्यक्ष रूप से धार्मिक संस्कारों का आचरण करने वाली तपस्वी, त्यागी एवं ज्ञानी विभूतियां एक अखंड परम्परा के रूप में अवतरित होती आई हैं। इन्हीं महान विभूतियों के चलते ही भारत की एक राष्ट्र के रूप में वास्तविक रक्षा हुई है। अतः हम भारतीय नागरिकों को यह भली भांति समझना होगा कि भारतीय समाज को समर्थ, धर्मनिष्ठ, प्रतिष्ठित बनाने में हम तभी सफल हो सकेंगे जब हम भारत की प्राचीन परम्परा को युगानुकूल बनाकर एक बार पुनः इसे पुनर्जीवित करेंगे।
उन्होंने संघ द्वारा संचालित पंच परिवर्तन विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए स्वदेशी के उपयोग, नागरिक कर्तव्यों के पालन, जाति-पांति भेद समाप्त कर सामाजिक समरसता, संयुक्त परिवार की आवश्यकता और स्व के बोध पर जोर दिया। इसलिए ये हमारी राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ करने वाले आयोजन सिद्ध हुए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष केवल इतिहास की उपलब्धियां नहीं है, बल्कि भविष्य की दिशा का संकल्प हैं।
सम्मेलन में क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश सरकार के राज्य स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने भी उपस्थिति दर्ज कराई इस दौरान उन्होंने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है एक सच्चरित्र, प्रामाणिक और संस्कारवान पीढ़ी का निर्माण करना। ऐसी पीढ़ी समाज का वातावरण सुधार कर घर और समाज में सुख शांति स्थापित कर सकती है। इसलिए, इन मूल्यों और संस्कारों को महत्व देने और उन्हें अपने जीवन में उतारने के प्रयास आज घर घर में होने लगा हैं। लोग अब ऐसे सभी मंचों और माध्यमों से जुड़ने के लिए प्रयत्नशील हैं जो इस दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। जैसे जैसे हिंदुत्व पर विश्वास बढ़ रहा है, वैसे वैसे भारत के प्रति श्रद्धा और विश्वास, व्यापक और गहरा हो रहा है। वहीं उन्होंने कहा कि आज भारत "वसुधैव कुटुंबकम्" के आदर्श पर चलकर भारत न केवल अपने समाज को सशक्त करेगा, बल्कि पूरी दुनिया को शांति, सद्भाव और सहयोग का संदेश देकर विश्वगुरु की भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम के अत में मंत्री पटेल ने सनातनियों को सम्रसभोज परसा सभी के साथ बैठकर भोजन किया।
उक्त हिन्दू सम्मेलनों में न केवल मातृशक्ति सहित सकल हिन्दू समाज की उत्साहपूर्वक भागीदारी रही है बल्कि साधु एवं सन्त महात्माओं द्वारा भी खुले हृदय से आशीर्वचन प्रदान किए गये। इस सम्मेलनों का आयोजन दरअसल सकल हिन्दू समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा मिलकर किया गया है। छोटे छोटे आपसी मतभेद समाप्त हों एवं विशेष रूप से युवा नागरिकों को हिंदू सनातन संस्कृति के संस्कारों से अवगत होने का सौभाग्य प्राप्त हो । हिन्दू सम्मेलनों के आयोजन का उद्देश्य भी सनातन संस्कृति, सनातन धर्म और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना है, जिसकी प्राप्ति होती हुई दिख रही है। कार्यक्रम में साधु-संत, कथा प्रवक्ता एवं बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता मंचासीन रहे। सम्मेलन शांतिपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।





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