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Wednesday, April 28, 2021
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रायसेन, मंडीदीप पहुंची 'प्राणवायु' वाली ट्रेन, भोपाल को मिली 32 टन 'ऑक्सीजन'।
रायसेन, मंडीदीप पहुंची 'प्राणवायु' वाली ट्रेन, भोपाल को मिली 32 टन 'ऑक्सीजन'।
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घातक रिपोर्टर, दीपांशु सिंह जादौन, रायसेन/मंडीदीप।
मंडीदीप। कोविड मरीजों के लिए ऑक्सीजन लेकर आ रही विशेष ट्रेन मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के मंडीदीप नगर पहुंच गई। यह ट्रेन 6 टैंकरों में 64 टन ऑक्सीजन लेकर आयी है। इनमें से 31 टन के दो टैंकर भोपाल के मंडीदीप मैं उतारे गए, 3 सागर के मकरोनिया, 1 जबलपुर के भेड़ा घाट में उतारे गए। यहां से इन्हें स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सौंप दिया जाएगा, ये ट्रेन झारखंड के बोकारो से आ रही है। पिछले 24 घंटे से ग्रीन कॉरिडाेर बनाकर यह 1153 किमी का सफर कर मंडीदीप सुबह 9 बजे पहुंची।
यहां टैंकर से ऑक्सीजन निकालकर जंबो सिलेंडरों में भरी जाएगी, फिर सिलेंडरों को उन अस्पतालों में बांट दिया जाएगा जहां कोविड के गंभीर मरीज भर्ती हैं, यह प्रक्रिया हर दिन होगी। स्वाथ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि अभी ज्यादातर मरीज होम आइसोलेशन में हैं। जो गंभीर मरीज भर्ती हैं, उनमें से किसी को 5 लीटर प्रति मिनट तो किसी को 15 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन लग रही है। यदि इस हिसाब से कैलकुलेट करें तो 64 टन ऑक्सीजन एक दिन में 40 हजार गंभीर मरीजों के काम आ सकती है।
यह ट्रेन 1153 किमी के सफर में पांच जगह रुकी। यहां लोको पायलट, असिस्टेंट व गार्ड सहित स्टाफ बदला गया। इसे लाने के लिए ग्रीन जोन बनाया गया था, इसका मतलब है कि रास्ते में अन्य किसी मालगाड़ी को इसके आगे नहीं चलाया जाएगा। फिर भी इसकी औसत रफ्तार 50 से 60 किमी प्रति घंटे रहेगी।
इस एक्सप्रेस में दो इंजन लगाए गए थे। एक इलेक्ट्रिक और दूसरा डीजल। यदि बिजली सप्लाई कभी भी फेल हो जाए या पॉवर ग्रिड जल जाए, तब भी डीजल इंजन से ऑक्सीजन एक्सप्रेस को सही समय पर गंतव्य तक पहुंचाया जा सके ऐसी व्यवस्था की गयी थी। रेलवे ने क्रॉयोजनिक टैंकरों से लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई कर रही है।
'प्राणवायु' लाने वाली ट्रेन का इंतजार मंडीदीप एवं आसपास के लोगों को बेसब्री से हो रहा था, जैसे ही इस ट्रेन की आने की सूचना लोगों को मिली लोग अपनी जान की बाजी लगाकर कोविड-19 संक्रमण जैसी महामारी को भी भूल कर रेलवे स्टेशन पर 'प्राणवाय' के टैंकरों को देखने के लिए पहुंच गए। जिसको कवर करने के लिए मीडिया कर्मी भी अपनी जान की बाजी लगाकर भीड़ में कवरेज नजर करते आए, हालांकि मौके पर पुलिस प्रशासन भी मौजूद रहा।
ऑक्सीजन संकट के वक्त जैसे रेलवे अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है, ठीक 37 साल पहले भी ऐसी ही जिम्मेदारी उस पर आ पड़ी थी। बात 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी की है। तब भोपाल स्टेशन मास्टर हरीश धुर्वे सहित 23 रेलकर्मियाें की मौत हो गई थी। पूरा स्टाफ बीमार था, तब मुंबई से रेल स्टाफ बुलाकर स्टेशन की कमान उसे सौंप दी गई थी।
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