लॉकडाउन में 25-30 प्रतिशत उद्योग बंद, चालू उधोगों मैं भी 50 फीसदी उत्पादन ठप। - Ghatak Reporter

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Monday, May 3, 2021

लॉकडाउन में 25-30 प्रतिशत उद्योग बंद, चालू उधोगों मैं भी 50 फीसदी उत्पादन ठप।

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लॉकडाउन में 25-30 प्रतिशत उद्योग बंद, चालू उधोगों मैं भी 50 फीसदी उत्पादन ठप।

लॉकडाउन में 25-30 प्रतिशत उद्योग बंद,चालू उधोगों मैं भी 50 फीसदी उत्पादन ठप।

घातक रिपोर्टर, अरविंद सिंह जादौन, भोपाल।
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मंडीदीप। कोरोना महामारी के कारण देश-प्रदेश के साथ ही उद्यौगिक नगरी में भी लॉक डाउन लगा हुआ है। बीते माह 16 अप्रैल से लागू इस लॉकडाउन का प्रभाव अब नगर के उद्योगो पर भी पड़ने लगा है। बाजारों के पूरी तरह बंद होने से उत्पादन उपयोग करने वाले उपभोक्ता तक न पहुंच पाने के कारण उत्पादन का खपत नहीं है नहीं है, जिससे उत्पादन उद्योग का उत्पादन ठप सा पड़ गया है। कच्चा माल न मिलने से नगर के करीब 25 से 30 प्रतिशत उद्योग पूरी तरह बंद हो गए है। वहीं जो उद्योग चालू हालत में है उनकी स्तिथि भी अच्छी नहीं कही जा सकती। इन उद्योगों में करीब 50 फीसदी उत्पादन कार्य हो रहा है। उद्यमियों का कहना है कि जब तक रिटेल मार्केट पूरी तरह से नहीं खुलता तब तक स्तिथिया सामान्य नहीं होने वाली क्योंकि बने हुए सामान का परिवहन नहीं होगा, सामान का ट्रांसपोर्ट नहीं होगा, खरीदने वाले नहीं मिलेंगे, ऐसे में हम उत्पादन कर सिवाय स्टोर में जमा करने के और कुछ नही कर सकते। इस कारण उद्यमी कम मजदूरों के साथ कम उत्पादन करने में ही समझदारी दिखा रहे है। उल्लेखनीय है कि नगर के औद्योगिक क्षेत्र में छोटे-बड़े लगभग 500 से अधिक उद्योग संचालित है। इन उद्योगो ने 56 हजार 542 से अधिक मजदूरों को प्रत्यक्ष रूप से और करीब 20 हजार से अधिक मजदूरों को आप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिया है। बीते एक साल से कोरोना वैश्विक महामारी फैली हुई है जिससे सभी तरह के क्षेत्र प्रभावित हुए है। इसके चलते पिछले एक साल से इन उद्योगों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है। कई उद्योग बीते वर्ष लगाए गए लॉकडाउन से अभी पूरी तरह से उबर भी नही पाए थे की बीते माह पुनः लॉकडाउन लगा दिया गया। इससे न केवल उद्योग प्रभावित हो रहे है बल्कि इसका असर मजदूरों के रोजगार पर भी पड़ रहा है। एक और जहां देश-प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों के बंद होने के कारण उद्योगो को कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है वहीं दूसरी ओर उद्योगों में कच्चा माल नही होने से उत्पादन नहीं हो पा रहा है इसके चलते मजदूरों को भी काम नही मिल पा रहा है।

मजदूरों का पलायन रोकने की उधोगपतियों की कवायद

रिटेल मार्केट बंद होने की वजह से जहाँ बाजर मैं खपत नहीं है होने से उत्पादन गिरा है वहीं मजदूरों के पलायन का खतरा बना है जिसे रोकने की उदोगपतियों ने कवायद की है। कई उद्योगों ने हफ्ते में केवल 5 दिन उद्योगों का चलाना प्रारंभ कर दिया है वही उद्योगों में भी मजदूरों को का पलायन रोकने के लिए मजदूरों को 15 दिन की ड्यूटी दी दे रहे हैं। प्रत्येक मजदूर को 1-1 दिन के अंतराल पर ड्यूटी लिया जा रहा है वहीं कुछ उधोगपति अब अपने उधोगों को हफ्ते मैं 4 दिन चलाने का सोच रहे हैं।

लॉकडाउन में 25-30 प्रतिशत उद्योग बंद,चालू उधोगों मैं भी 50 फीसदी उत्पादन ठप।

मजदूरों के बीमार पड़ने और कच्चे माल की कमी के कारण प्रभावित हुआ प्रोडक्शन

टॉफी बनाने वाली मैक्सन कंपनी के डायरेक्टर राजेंद्र पटेल का कहना है कि कोविड जिस तरह फैला रहा है उसे देख कर वर्कर नहीं आ रहे हैं। जो है वह आधे से ज्यादा बीमार पड़े हुए हैं। इस कारण वर्करों की कमी बनी हुई है। प्रोडक्शन 50 प्रतिशत के आसपास चल रहा है। लॉकडाउन के कारण डिमांड नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा एक्सपोर्ट के लिए ट्रक नहीं मिलता, उसका भी किराया बढ़ गया। जो हमारी गाड़ी पहले मुंबई के कोलारस 30000 में जाती थी, अब वह 45000 में जा रही है। जब तक लॉक डाउन नहीं खुलेगा डिमांड भी नहीं बढ़ेगी। रो मटेरियल की कीमत भी बढ़ गई है। कंटेनर का किराया भी 2 गुना से अधिक हो गया है। एक्सपोर्ट के लिए पहले जो कंटेनर 2000 डॉलर में मिलता था। वह अब 4500 डॉलर में मिल रहा है। हम अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और मलेशिया सहित अन्य देशों में निर्यात करते हैं लेकिन इन देशों में एक्सपोर्ट करने के लिए कंटेनर मिल ही नहीं रहे है। इसका कारण कंटेनर के मालिक चाइनीस कंपनी के है जो कंटेनर सबसे पहले मिलते हैं वह अपने देश में बुला लेते हैं। दिक्कत बहुत है लेकिन जो लोगों की जाने जा रही है उसे देखते हुए संभल कर अपने स्टाफ के साथ जो सहयोग कर सकते हैं उतना करने का प्रयास कर रहे हैं।

इनका कहना है...

कोरोना ने पैर ज्यादा ही पसार लिए है, अभी वर्कर काम करने से भी डरने लगे हैं। मार्केट बंद होने के कारण अधिकांश यूनिट्स बंद होने के कगार पर आ गई हैं। 25-30 प्रतिशत उद्योग पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। धीरे-धीरे कोई-कोई यूनिट्स ही चल रही हैं, उनमें भी 50 प्रतिशत की उत्पादन हो पा रहा है।
राजीव अग्रवाल, अध्यक्ष एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज, मंडीदीप

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