नरसिंहपुर/तेंदूखेड़ा, लाकडाउन में भी बाहर निकलना बना मजबूरी, पानी को लेकर परेशान हो रहें ग्रामीण। - Ghatak Reporter

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Monday, May 3, 2021

नरसिंहपुर/तेंदूखेड़ा, लाकडाउन में भी बाहर निकलना बना मजबूरी, पानी को लेकर परेशान हो रहें ग्रामीण।

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लाकडाउन में भी बाहर निकलना बना मजबूरी, पानी को लेकर परेशान हो रहें ग्रामीण।

नरसिंहपुर/तेंदूखेड़ा, लाकडाउन में भी बाहर निकलना बना मजबूरी, पानी को लेकर परेशान हो रहें ग्रामीण।

घातक रिपोर्टर, धर्मेन्द्र साहू, नरसिंहपुर/तेंदूखेड़ा।
तेंदूखेड़ा। एक तरफ जहां लाकडाउन को लेकर लोगों को घरों में ही रहने प्रेरित किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ पानी जैसी समस्या को लेकर ग्रामीण मजबूर होकर दूर-दूर से पानी लाने के लिये विवश है। आदिवासी बाहुल्य ग्राम तथा स्वतंत्रता आंदोलन मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले राजा डेलन शाह नरबर शाह की शहीद स्थली ग्राम ढिलवार में पानी समस्या कोई आज की समस्या नहीं है। गर्मी आते ही यहां की समस्या गंभीर हो जाती है और गर्मी निकलने के बाद बरसात में हेंडपंपों से पानी निकलने के बाद बात पाई गई हो जाती है। वर्तमान समय में पानी की गंभीर स्थिति बन गई है और यहां के लोग अपने निस्तार के पानी से लेकर पीने तक के पानी को आस-पास के खेतों में स्थित कुओं से सिर पर साईकल पर कुप्पों के माध्यम से पानी ढोते हुए देखे जा सकते है। पानी की समस्या का निराकरण न हो पाने के पीछे केवल स्थानीय इकाई की इच्छा शक्ति का अभाव देखा जा रहा है। केवल शासन-प्रशासन की ही जवावदेही मानकर समस्या निराकरण की दिशा मे यदि ईमानदारी से पहल की जाती या समस्या निराकरण के उचित सुझाव दिये जाते तो अभी तक समस्या का निराकरण संभव हो जाता।

नरसिंहपुर/तेंदूखेड़ा, लाकडाउन में भी बाहर निकलना बना मजबूरी, पानी को लेकर परेशान हो रहें ग्रामीण।

गहरा नाला से उपलब्ध हो सकता है पानी

ढिलवार के समीप पीपरवानी जाने वाले रास्ते पर बीच में लगभग एक कि.मी. की दूरी पर गहरा नाला नामक नाला पड़ता है। जिसमें पानी उपलब्धता काफी लंबे समय तक बनी रहती है। जिस कारण से जमीनी जलस्तर भी काफी बेहतर बना रहता है। इस नाले के समीप पीएचई विभाग के माध्यम से अभी तक गड्ढों के नाम पर जितनी राषि खर्च की गई यदि उसे मिलाकर इस नाले के बाजू से गड्ढा खनन कर पाईप लाईन के माध्यम से पानी ढिलवार पहुंचाया जाता तो लोगों के निस्तार के साथ पेयजल भी संभव हो जाता। लगभग दो से ढाई हजार की आबादी वाले इस ग्राम में 70-80 हेंड पंप लगे हुए है। लेकिन बरसात और ठंड के दिनो तक ही कामयाब रहते है बाकी दिनों में केवल उक्त हैेड पंप शोभा की सुपाड़ी बन जाते है।

नरसिंहपुर/तेंदूखेड़ा, लाकडाउन में भी बाहर निकलना बना मजबूरी, पानी को लेकर परेशान हो रहें ग्रामीण।

पुराने तालाब के पास कुऐं से भी आ सकता था पानी

ग्राम पंचायत ढिलवार के अंतर्गत मुख्यमंत्री ग्राम सरोवर योजना के तहत 1.6 करोड़ की लागत से तालाब खोदा गया था लेकिन भ्रष्टाचार की भेट चढ़ जाने के कारण तालाब में बूंद भर पानी नहीं बचा है। बल्की इसी तालाब के बाजू से काफी प्राचीन तालाब जिसमें वर्श भर पानी रहने के साथ लोंगों का निस्तार होने के साथ मवेषियों को भी व्यवस्था बनी रहती थी। लेकिन नया तालाब बनाने वाले ठेकेदारों द्वारा इस प्राचीन तालाब के साथ खिलवाड़ करते हुए जहां तहां से खोद कर डाल दिया। इसी प्राचीन तालाब के बाजू से यदि एक कुआं खुद जाता तो उसके माध्यम से भी विद्युत मोटर से पाईप लाईन से ढिलवार में पानी पहुंचाया जा सकता था। लेकिन इन समानाधात्मक व्यवस्थाओं की ओर न तो स्थानीय इकाई और अधिकारियों का ध्यान दिया जा रहा है। पानी की समस्या के निराकरण की दिषा में सार्थक पहल की आवश्यकता है। एक तरफ जहां शासन-प्रशासन पेयजल समस्या के निराकरण को लेकर धन राशि खर्च कर रहा है। यदि सार्थक दिशा में यह धन खर्च हो जाये तो और भी श्रेष्ठकर हो जाता।

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