बकस्वाहा बन्दर हीरा खदान - जंगल कटने से पर्यावरण प्रेमियों में रोष - चौधरी भूपेंद्र सिंह। - Ghatak Reporter

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Thursday, May 6, 2021

बकस्वाहा बन्दर हीरा खदान - जंगल कटने से पर्यावरण प्रेमियों में रोष - चौधरी भूपेंद्र सिंह।

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बकस्वाहा बन्दर हीरा खदान - जंगल कटने से पर्यावरण प्रेमियों में रोष - चौधरी भूपेंद्र सिंह।

बकस्वाहा बन्दर हीरा खदान - जंगल कटने से पर्यावरण प्रेमियों में रोष - चौधरी भूपेंद्र सिंह।

घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे।
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बकस्वाहा जंगल में हीर की बन्दर खादान में देश के सबसे बड़े हीरा मिलने की उम्मीद में यह नवीन खदान बन रही है। इसके लिए जंगल के काटने सम्बंधित समाचार प्रकाशित होने के बाद भारत भर के पर्यावरण विद लामबद्ध हो रहे हैं क्योंकि इस खदान को बनाने के लिए 3.30 हजार पेड़ सेंकडो एकड़ में फैले जंगल को नष्ट किया जाएगा। तो भोपाल के वरिष्ठ समाजसेवी सह पर्यावरणविद समाजसेवी चौ भूपेंद्र सिंह, पर्यावरणविद करुणा रघुवंशी भोपाल म.प्र ने इस पर रोष प्रकट किया है साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान को एक ज्ञापन प्रेषित कर मांग की है कि छतरपुर जिला मे बकस्वाहा बन्दर हीरा की खदान की नीलामी कर दी गई है जिसे बिड़ला ग्रुप की कम्पनी ने लिया है। अब कम्पनी इस पर खदान संचलित करेगी जिससे सेंकडो एकड़ में फैले जंगल मे करीब कारण सागौन, इमरती, इमली, अजुर्न, सेमल औषधीय पेड़ पौधे सहित 2.30.000 (दो लाख तीस हजार) हरे भरे वृक्षों को काटा जाएगा। साथ ही ज्ञापन में सरकार का ध्यान विशेष रूप से उत्कृष्ट कराते हुए बताया की एक स्वस्थ वृक्ष से प्रतिदिन 230 लीटर ऑक्सीजन मिलता है जिससे 07 लोगों को प्राणवायु प्राप्त होता है। आकलन करें तो 5,29,00,000 लीटर ऑक्सीजन प्रतिदिन हम मानवों को मिलता है जिससे प्रतिदिन कुल वृक्षों की संख्या से औसतन 75,57,142 नागरिकों को ऑक्सीजन प्राप्त हो रहा है। जंगल की कटाई से सीधा असर पर्यावरण पर पड़ेगा और तापमान मे काफी वृद्धि होगी। इस तापमान को संतुलन करने मे कम से कम 50 वर्ष तक लग सकता है। ज्ञात हो की विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी का हमारा देश वर्तमान समय मे covid19 के कारण विश्व ऑक्सीजन की समस्या से जूझ रहा है, संकट गहराता जा रहा है। इस सम्बंध में देशभर के पर्यावरण संरक्षकों से वार्ता की जा रही है जिसमे उद्घोष फाउंडेशन, झारखण्ड, पीपल नीम तुसली अभियान बिहार, चौधरी भूपेंद्र सिंह, प्रताप संस्थान बरेली जिला-रायसेन, राज द्विवेदीजी सतना, सुदेश बाघमारे सहित सैकड़ों पर्यावरण संस्थाए हैं और सभी का साथ भी मिलना शुरू हो गया है। सरकार से अनुरोध करते हुए करुणा रघुवंशी ने बकस्वाहा जंगल की बन्दर खदान की नीलामी रद्द करते हुए पर्यावरण और मानव जीवन सहित जीव-जन्तु, पशु–पक्षी को संरक्षित करने के लिए सकारात्मक पहल करने की सरकार से मांग की है।

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