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Chief Editor GHATAK REPORTER
BHOPAL
जन्मदिन पर हुई 3 साल के मासूम की हत्या का हुआ खुलासा, जादू-टोने के शक में चाचा ने ही की हत्या, रोजाना सांत्वना देने जाता था घर।
खंडवा। 3 साल के अक्षांश हत्याकांड में नया खुलासा हुआ है। आरोपी श्रीराम (57) रिश्ते में बच्चे का चाचा लगता है। वह अक्षांश के पिता का चचेरा भाई है। घर के सामने महज 15 कदम दूर ही रहता है। यही नहीं, वारदात को अंजाम देने के बाद वह रोजाना अक्षांश के घर जाकर परिवार को सांत्वना देने का नाटक भी कर रहा था। मामले में पुलिस ने करीब 60 लोगों से पूछताछ की। आरोपी को हम्माली नहीं मिलने से बेवजह अपने बच्चों पर चिढ़ जाता था। इस कारण उसे जादू-टोने का शक हो गया। कई बार अक्षांश के घर के सामने आकर बिना नाम लिए गाली-गलौज करने लग जाता। फिर ठान ली कि परिवार को गहरा दर्द देना है। इधर, बच्चे के पिता ने आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की है। पुलिस के मुताबिक, 20 अक्टूबर को इलाके में बोरी में बंद बच्चे का शव मिला था। वारदात का चश्मदीद नहीं था, परिवार वाले किसी से विवाद भी नहीं बता रहे थे।

4 दिन में करीब 60 लोगों से पूछताछ की। 12 से 15 लोगों के बयान में सामने आया कि अक्षांश के घर से 15 कदम दूर रहने वाला श्रीराम कई बार मोहल्ले में आकर बिना किसी का नाम लिए गाली-गलौज करता है। उसके साथ बुरा करने वाले के परिवार को उजाड़ देने की बात कहता रहता था। इसके बाद पुलिस की सुई श्रीराम पर आकर टिक गई। घर की सर्चिंग की, तो यहां रखी बोरी घटना स्थल पर मिले बोरी से मैच हो गए। बोरी की रस्सी, धागा और मार्क सब कुछ क्लियर था। इतने में श्रीराम की लड़की ने बेहोश होने की नौटंकी कर दी। पुलिस का शक गहरा गया। दूसरे दिन पूछताछ के लिए बुलाया। सख्ती से पूछा, तो गुनाह कबूल कर लिया।
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| मासूम का खंडर में मिला था शव |
श्रीराम कुटुम्ब-परिवार का हाेने से उसके घर बच्चे का आना-जाना था। श्रीराम ने पुलिस को बताया कि वारदात वाले दिन दोपहर 2 बजे अक्षांश उसके घर गया। उस समय श्रीराम हम्माली करके लौटा था। अक्षांश को देखकर माथा ठनका। लेजम से गला घोंट दिया। फिर खुद होश खो बैठा। 10 मिनट तक प्रायश्चित करने लगा कि मैंने अपने ही कुल के बच्चे को मार दिया। उसने मेरा क्या बिगाड़ा था। मेरे मरने के बाद अर्थी को कंधा देता, तो मुंडन कराता। श्रीराम ने पुलिस को बताया कि होश आने के बाद जैसे-तैसे लाश को ठिकाने लगाने में जुट गया। घर में रखी टाट की बोरी लाया। उसमें भरा और बाड़े में ले गया। बाड़े में ले जाकर बोरी में ऊपर से सोयाबीन का चारा (कट्टी) भर दिया। शाम तक यहीं रखा, फिर अंधेरा होते ही पड़ोस के खंडहर मकान में छोड़ आया। ऊपर से प्लास्टिक की खाद वाली थैली रख दी। परिवार वाले ढूंढ़ने लगे, तो उनकी मदद करने लगा। उन्हें चकमा देकर लाश के पास आया और थैली हटा दी, ताकि घर वालों को लाश मिल जाए।
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| आरोपी श्रीराम |
श्रीराम वारदात के बाद रोज हम्माली पर जाता था। इस बीच, परिवार में भीड़ देख खुद भी शामिल हाे जाता था। यहां सांत्वना देने लग जाता था। यही नहीं, कई बार घंटों तक अक्षांश के घर बैठा रहकर पुलिस के मूवमेंट और घर में चल रही गतिविधियों पर भी नजर रखता था। कातिल श्रीराम के पिता कोटवार थे। तब से उसका थाने में आना-जाना चलता था, इसलिए पुलिस वालों से जान-पहचान थी। परिवार में उसकी मां, पत्नी समेत एक लड़का और दो लड़कियां हैं। वारदात के समय मां, पत्नी और बड़ी लड़की खेत पर गई थीं। लड़का और लड़की मां का अलग से बने घर में पढ़ाई कर रहे थे। जिस घर में हत्या की वह 6 फीट की गली में था।
अक्षांश के पिता श्याम कोठारे और दादा ने वारदात के खुलासे के बाद कहा कि, बेटे के कातिल काे फांसी पर चढ़ा दो। आखिर हमारे परिवार और उस मासूम ने क्या बिगाड़ा था कि उसकी जान ले ली।
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