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Sunday, September 11, 2022

शत-शत नमन, विन्रम श्रद्धांजलि ॐ शांति

शत-शत नमन, विन्रम श्रद्धांजलि ॐ शांति

शत-शत नमन, विन्रम श्रद्धांजलि ॐ शांति

घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे, रायसेन।
रायसेन। धर्म सम्राट परम पूज्य प्रातः स्मरणीय शिव स्वरूप जगतगुरू स्वामी श्री 1008 शंकराचार्य स्वरूपानंद जी सरस्वती महाराज जी का देवलोक गमन से सनातन धर्म की अपूर्णीय क्षती हुई। वे सदैव सनातन के सारथी थे, बल्कि राष्ट्र प्रेम की भावना भी उनमें कूट-कूट के भरी हुई थी। किशोरावस्था में वे अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में कार्य करते रहे, अंग्रेज उनसे भय भीत रहते थे। बरमान के शिव मंदिर में उन्होंने अज्ञात वास काटा, मुखबिर की सूचना पर उनकी गिरफ्तारी हुई। मेरे ख्याल से आजाद भारत के वे अन्तिम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अब तक रहे थे। राष्ट्र की साधना के साथ ही उन्होंने सनातन की ध्वजा को सर्वोपरि रखा, उसके लिए उन्हने स्पष्ट दिशा निर्देश दिए। किसी भी सूरत में सनातन पर अतिक्रमण बरदास्त नही था। तर्क सम्मत पैरोकार थे, उनके कार्यकाल में देश भर में अनेक आश्रम बनाए गए जँहा संस्कृत विधालय देव आराधना से लेकर राष्ट्र की आराधना भी होती है। अनेक आश्रमो में निराश्रित महिलाओं व्रद्ध की सेवा होती है। जगत गुरु शंकराचार्य जी की अति महत्वपूर्ण दुर्लभ गोपनीय गुफा जँहा उन्हें गुरु के साक्षात्कार हुए स्थल की खोज भी की। भारत वर्ष में वे एक मात्र द्वयी पीठाधीश्वर थे। उनकी जगह हमेशा खाली रहेगी।  ईश्वर उनकी आत्मा को श्री चरणों मे स्थान दें।

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