रायसेन, गांव से न निकल सकें डंपर, इसलिए खोदी गहरी खाई और रास्ते में डलवा दी मिट्टी और बोल्डर। - Ghatak Reporter

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Sunday, April 2, 2023

रायसेन, गांव से न निकल सकें डंपर, इसलिए खोदी गहरी खाई और रास्ते में डलवा दी मिट्टी और बोल्डर।

गांव से न निकल सकें डंपर, इसलिए खोदी गहरी खाई और रास्ते में डलवा दी मिट्टी और बोल्डर।

रायसेन, गांव से न निकल सकें डंपर, इसलिए खोदी गहरी खाई और रास्ते में डलवा दी मिट्टी और बोल्डर।

घातक रिपोर्टर, राकेश दुबे, रायसेन।
रायसेन। नर्मदा तट अलीगंज में वैसे तो सरकारी स्तर पर कोई रेत खदान नहीं है, पर दबंग लोग अपने स्तर पर रेत का अवैध उत्खनन करवाते हैं। नर्मदा नदी के इस तट से रोजाना 40 से 50 ट्राली रेत उठाई जा रही थी। इसकी शिकायत गांव के लोग लगातार प्रशासनिक अधिकारियों से कर रहे थे। लेकिन जब अधिकारियों ने अवैध उत्खनन करने वालों पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की तो ग्रामीणाें ने ही एकजुटता का परिचय देकर नर्मदा नदी की तरफ जाने वाले उन सभी रास्तों को मिट्टी का ढ़ेर लगाकर और वहां पर गहरी खुदाई करवाकर बोल्डरों को पटक कर पूरी तरह से बंद कर दिया, जहां से प्रतिदिन रेत भरने के लिए ट्रैक्टर-ट्राली और डंपर जाते थे। गांव के रास्ते से दिन-रात निकलने वाले रेत से भरे वाहनों को रोकने के लिए सरपंच प्रतिनिधि रघुवीर सिंह पटेल और सचिव केशर सिंह ने ग्रामीणों के साथ मिलकर नर्मदा तट वाले उन सभी रास्तों पर जगह-जगह मिट्टी के ढ़ेर लगवा दिए। इसके साथ ही गांव के लोगों ने अब अपने स्तर पर गांव में रेत लेने के लिए आने वाले वाहनों को गांव के बाहर ही रोकने की तैयारी कर ली है। ऐसे वाहनों को गांव के बाहर से ही लौटाया जा रहा है। इससे वाद-विवाद की स्थिति बन रही है। हालांकि गांव के लोगों की एकजुटता के कारण रेत के वाहन अब गांव के अंदर नहीं जा पा रहे हैं।

वसूली लक्ष्य से अधिक

जिले के खनिज विभाग को वित्तीय वर्ष 2022–23 में 20 करोड़ राजस्व वसूली का लक्ष्य मिला था। इसके विरुद्ध 20.14 करोड़ की खनिज राजस्व वसूली कर राजस्व मद में जमा कराई गई, जो लक्ष्य से अधिक है। जिला खनिज अधिकारी आरके कैथल ने बताया कि जिले भर में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण को लेकर साल भर में 120 प्रकरण दर्ज किए हैं, जिन पर 1.90 करोड रुपए अर्थ दंड लगाकर उसकी वसूली भी की गई है।

56 रेत खदान, कई शहरों में रेत सप्लाई

रायसेन जिले में नर्मदा तट पर करीब 56 रेत खदानें हैं। इनका ठेका एफोरिया माइनिंग और पुष्पा माइनिंग के पास है। नर्मदा तट से रेत उठाकर उसे कई शहरों तक पहुंचाया जा रहा है। इन दोनों कंपनियों ने करीब 49 करोड़ 41 लाख रुपए में इन रेत खदानों का ठेका लिया है।

अब तक तीन डंपरों को ग्रामीणों ने किया आग के हवाले



ग्रामीण क्षेत्र में लगातार विरोध

गांव के रास्तों से निकलने वाले ट्रक, डंपर और ट्रैक्टर-ट्रालियों को लेकर लगातार ग्रामीण क्षेत्रों मेंं विरोध के सुर सुनाई देते रहे हैं। दो माह के भीतर अब तक तीन डंपरों को ग्रामीण आग के हवाले कर चुके हैं। 6 फरवरी को बाड़ी तहसील के गांव मनकापुर में ग्रामीणों ने दो डंपरों में आग लगा दी थी। इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों की गिरफ्तारी की है। 28 मार्च को बगलवाड़ा में भी रेत से भरे एक डंपर को ग्रामीणों ने जला दिया। इसके बाद भी रेत से भरे वाहन गांव के रास्ते से निकाले जा रहे हैं, इससे ग्रामीणों में आक्रोश है।

रोड हुई क्षतिग्रस्त

गांव के सरपंच प्रतिनिधि रघुवीर सिंह ने बताया कि मुख्य मार्ग से नर्मदा की ओर जाने वाला रोड ओवर लोड ट्रैक्टर-ट्रालियों के निकलने से क्षतिग्रस्त हो गया है। इसी रोड पर सरकारी स्कूल भी है, छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने के लिए जाते हैं। इसके अलावा श्रद्धालु भी इस मार्ग से नर्मदा स्नान करने जाते हैं, लेकिन दिन-रात इस रोड से निकलने वाले रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रालियों से बच्चों और श्रद्धालुओं को एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है। यही कारण है की लोगों का विरोध बढ़ता जा रहा है।

इनका कहना है...

जिले भर में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण को लेकर लगातार कार्रवाई होती है। अवैध उत्खनन को सख्ती से रोका जाएगा। खदानों पर पहुंचकर जांच पड़ताल भी की जाती है, ताकि अवैध उत्खनन करने वालों में भय बना रहे। ग्रामीणों की शिकायत पर भी कार्रवाई की जाएगी।
आरके कैथल, जिला खनिज अधिकारी, रायसेन

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