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Thursday, August 24, 2023

गुना विधानसभा व मतदाता :- विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता जनता की सेवा में इस कदर ओतप्रोत की बना चर्चा का विषय।

गुना विधानसभा व मतदाता :- विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता जनता की सेवा में इस कदर ओतप्रोत की बना चर्चा का विषय।

गुना विधानसभा व मतदाता :- विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता जनता की सेवा में इस कदर ओतप्रोत की बना चर्चा का विषय।

घातक रिपोर्टर, राजू प्रजापति, गुना।
गुना। विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता जनता की सेवा का भाव से इस कदर ओतप्रोत हैं कि सभी रामराज्य की चर्चा कर जनता को अपनी बातों से मोहने में लगे हुए हैं। आगामी चुनाव 2023 विधानसभा की स्थिति में राजनीतिक दलों की क्या स्थिति बनेगी यह तो मतदान के समय पर ही पता चलेगा परंतु पूरे प्रदेश का माहौल पूर्ण रूप से राजनैतिक उठापटक का बना हुआ है। सभी दलों के कार्यकर्ता अपनी स्व. प्रमाणीकरण के आधार पर अपनी योग्यता का प्रदर्शन कर स्वयं को योग्य जनसेवक साबित करने में लगे हुए हैं। वहीं कुछ धर्म की आड़ को लेकर सच्चा भक्त एवं सुपर बनाने में लगे हुए हैं। ऐसी विकट परिस्थितियों में सत्तारूढ़ भाजपा में सर्वाधिक समस्याएं पैदा हो रही हैं। इसका ताजा उदाहरण चाचौड़ा विधानसभा का विवाद है। गुना विधानसभा की जनता द्वारा एवं सर्वे का आधार यह है कि भाजपा में उम्मीदवारों की बात करें तो प्रथम वर्तमान विधायक गोपीलाल जाटव हैं। वह 5 बार के विधायक हैं, वहीं पूर्व विधायक पन्नालाल पुराने हादसे को भरपाई में अबकी बार मान रही हैं। फेहरिस्त बहुत लंबी है। नीरज निगम, सुनील मालवीय, रमेश मालवीय, कमर लाल परसोंलिया, लक्ष्मण जाटव, पप्पू खटीक, कुलदीप आल्हा पुरिया सहित कई योग्यता क्रम के साथ दौड़ में लगे हुए हैं। गुना विधानसभा की स्थिति का जायजा ले तो मतदाता की स्थिति यह है कि यहां पर 70 प्रतिशत मतदाता स्वर्ण एवं पिछड़ा है और शहरी है। यह जो बाहुल्य वाला मतदाता ही विधायक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है। गुना विधानसभा क्षेत्र का मतदाता ऐसा विधायक चाहता है जो मिलनसार एवं सहज उपलब्ध हो, ऐसी सोच मतदाता ने पूर्व में जाहिर करके राजेंद्र सलूजा को निर्दलीय विधायक बनाया था। विधानसभा की इन सभी उम्मीदवार को लेकर स्थानीय मतदाताओं से चर्चा हुई तो कई आश्चर्यजनक तथ्य निकल कर सामने आए। गुना से भाजपा किसे और किस मापदंड के आधार पर प्रत्याशी बनाएगी यह सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। भाजपा में संगठन वर्सेस सिंधिया जी में विधायकी को लेकर होड़ मची हुई है। गुना विधानसभा में कोई भी प्रतिनिधि भाजपा की छाप छोड़ने में असफल रहा है। इन सभी की योग्यता व्यक्तित्व, गुण, पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जांचेगा, फिर विधायकी का टिकट देगा। आज संपूर्ण मध्यप्रदेश में बेरोजगारी, लूट, अनुशासनहीनता का माहौल बना हुआ है। वहीं मतदाता को बिकाऊ समझकर कर फर्जी घोषणा वीर बने हुए हैं। इस चुनावी दौर की घोषणाओं के मर्म को और भाजपा की नियत दोनों को मतदाता समझ रहा है। क्योंकि पूर्व के 4 वर्षों में आपको कर्मचारी, व्यापारी और आमजन की भावना या जरूरत का ध्यान नहीं आया। आप फिर 5 वर्ष नजर नहीं आएंगे। कर्ज से जनता को नगद देना विकास नहीं विनाश है। जन चर्चा अनुसार आज जैसा भ्रष्टाचार और निरंकुश शासन कभी नहीं देखा जो नेता कार्यकर्ताओं के खर्चे पर प्रवास करते थे, वह आज पार्टी के कर्णधार और जननायक कुबेर पुत्र बने हुए हैं और कुबेर पुत्र बनने में लगे हुए हैं। भाजपा की रीति-नीति से जनता दुखी होकर सत्ता परिवर्तन तक की सोच रही है। देखने में शासन की उज्ज्वला योजना हो या आवास योजना हो सभी भ्रष्टाचार से परिपूर्ण हैं, जनता को दुखी करने वाली साबित हुई है। इस सभी तथ्यों का विरोध भी एक बड़ा कारण होगा। विधानसभा मध्यप्रदेश की अभी हाल ही में जिस नीति के आधार पर टिकट वितरण पार्टी ने किया है वह गुना विधानसभा से वर्तमान विधायक गोपीलाल जाटव हैं जो 5 बार के विधायक हैं, वह स्वयं को इस पद के योग्य मानते हैं। परंतु जैसा उनका कार्यकाल रहा है, इसमें कई बातें वायरल हुई जो उनके लिए वर्तमान में सबसे ज्यादा घातक साबित होंगी और पार्टी के पास सभी प्रमाण मौजूद हैं। ऐसी स्थिति में क्या गोपीलाल को कमल मिलेगा, ऐसा प्रतीत होता नहीं दिख रहा है। वहीं पूर्व विधायक पन्नालाल योग्य, पढ़े लिखे हैं, अनुशासित हैं परंतु उम्र एवं स्वास्थ्य भी जरूरी है। नीरज निगम, सुनील मालवीय सिंधिया ग्रुप के द्वारा दावेदारी में लगे हुए हैं। वही कमर लाल, रमेश मालवीय, लक्ष्मण जाटव, पप्पू खटीक, कुलदीप आल्हापुरिया सहित अन्य संगठन और पार्टी को महत्वपूर्ण मानकर और पुराना कार्यकर्ता मानकर दावेदारी को मजबूत मान रहे हैं। देखना यह है कि क्या पार्टी सिंधिया ग्रुप को तरजीह देती है या पार्टी वर्तमान विधायक की गलतियों को क्षमा करेगी। संपूर्ण स्थिति तो चुनाव के बाद ही पता चलेगी की जनता ने किसे जनसेवक माना है। वही अपनी दावेदारी जाता रहे कुलदीप आल्हा पुरिया का कहना है कि वह और उसका परिवार 50 वर्षों से आर.एस.एस एवं पार्टी की रीति नीति पर चलकर अनुशासित होकर जन सेवा कर रहा है। आल्हापुरिया सब इंजीनियर होकर स्टांप वेंडर का कार्य करते है और शहर के सभी वर्गों एवं व्यापारियों में उनकी अच्छी पकड़ है, यह एक उनका दावा रखने का मजबूत कारण है। आलापुरिया अपने परिवार की पार्टी के प्रति विचारधारा का समर्पण और अनुशासन को अपनी मुख्य ताकत मानकर स्वयं को मुख्य दावेदार बता रहे हैं। समय आने पर मतदाता के द्वारा ही भविष्य का निर्धारण होगा।

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