विश्वगीताप्रतिष्ठानम् एकादशी पर श्रीमद्भगवद्गीता को राष्ट्रग्रंथ घोषित करने महामहिम राष्ट्रपति महोदय के नाम सोंपा ज्ञापन।
राकेश दुबे, घातक रिपोर्टर
बरेली
विश्वगीताप्रतिष्ठानम् और मध्यप्रदेश शासन के संयुक्त तत्वावधान में अन्तर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में श्रीमद्भगवद्गीता को भारतीय संविधान में राष्ट्रग्रन्थ के रूप में प्रतिष्ठित करने हेतु ज्ञापन मुख्य अतिथि राकेश शर्मा श्रीमतिसविता जमना सेन के माध्यम से एडीएम महोदय मनोज उपाध्याय , को संरक्षक श्री 1008 राम दास त्यागी, दयानंद महंत , ओम प्रकाश शास्त्री , पंडित दामोदर अवधनारायण तिवारी संयोजक, पंडित मनीष बबेले महामंत्री , पं. रोहित दुबे, व अन्य विद्वान, शिक्षक गणों एवं छात्र-छात्राओं के साथ लगभग 2100 लोगों के समक्ष महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया ।
विश्व गीता प्रतिष्ठानम् रायसेनम् जिला संयोजक पं. दामोदर प्रसाद तिवारी ने गीता प्रतिष्ठान के लक्ष्य और उद्देश्यों को बताते हुए कहा कि हमारा गीता प्रतिष्ठान लगभग 28 वर्ष से संपूर्ण भारत में श्रीमद् भागवत गीता को घर-घर प्रचार कर संस्कार का पुनः उदय कर रहा है, साथ में श्रीमद्भागवत गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ बनाने हेतु तथा भारत को बना पुनः विश्व गुरु बनाने हेतु तथा बच्चो को गीता ज्ञान हेतु माध्यमिक शिक्षा मंडल में गीता को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने हेतु एवं कई अन्य धार्मिक लक्ष्य एवं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लगातार 28 वर्षों से घर-घर जाकर गीता का प्रचार कर रहे है।
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष मोक्षदा एकादशी को संविधान में श्रीमद् भगवत गीता को राष्ट्र ग्रंथ बनाने हेतु ज्ञापन दे रहे हैं।
क्योंकि गीता जी ही मात्र एक ऐसा शास्त्र है जिसको न्यायालय भी मान्यता प्राप्त एवम सभी शास्त्रों की स्वामिनी है,
भगवान श्री कृष्णचंद्र के मुख से स्वयं प्रकट हुई है गीता जी को उत्तम शास्त्र है, श्रीमद्भागवत गीता मधुसूदन जनार्दन श्रीकृष्ण जी के मुखारविंद से निकली हुई वाणी है। (वाणी अर्थात मां सरस्वती स्वयं है!) इसलिए हम महामहिम राष्ट्रपति से आग्रह करते हैं कि श्रीमद्भगवत गीता को राष्ट्र ग्रंथ घोषित कर बच्चों के उज्जवल भविष्य एवं उनमें संस्कृत संस्कृति, संस्कार का उदय करने हेतु राष्ट्र ग्रंथ घोषित कर महान कृपा करें l



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