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Friday, December 5, 2025

कविता- मैं किसी से कम नहीं – और किसी का मोहताज नहीं

 

 मैं किसी से कम नहीं – और किसी का मोहताज नहीं

मैं किसी से कम नहीं – और किसी का मोहताज नहीं


मुझे परवाह नहीं किसी की—
कौन क्या बोलता है, कौन किसको साथ देता है,
मैं उन लोगों में से नहीं
जो भीड़ देखकर अपना हौसला नापते हैं।

दल्ले मेरी पीठ पीछे क्या कहते हैं—
कहने दो,
पीठ पीछे वही बोलते हैं
जिनमें सामने नज़र मिलाने की ताकत नहीं होती।

मेरी परिस्थिति?
हाँ, उसने मुझे तोड़ा…
पर कमज़ोर नहीं किया।
मैं टूटा नहीं—
मैं धारदार हुआ हूँ।

मेरे शोर-गुल पर दुनिया चाहे जितना तंज कसे,
मुझे पता है
खामोशी में पलने वाला इरादा
एक दिन गरजकर ही दम लेता है।

मित्र?
कुछ साथ खड़े रहे,
कुछ भीड़ में खो गए,
कुछ फायदा उठाकर भूल गए—
पर मैंने किसी को कोसा नहीं,
क्योंकि मुझे अपने पैरों पर खड़ा रहना आता है।

ईश्वर मेरे साथ है,
लेकिन मैं उन लोगों जैसा नहीं
जो भगवान का नाम लेकर अपनी आलसी नियति को ढोते हैं,
मैं मेहनत पर भरोसा करता हूँ—
और बाकी ऊपरवाला संभालता है।

लोग कहते हैं—
“ये इतना सीधा क्यों रहता है?
दिखावा क्यों नहीं करता?”
उन्हें क्या पता
कचरे मैं पड़ी पन्नी ही चमकती है ,
दल्लों की तरह हीरे नहीं।

मैं दिखावा इसलिए नहीं करता
क्योंकि मेरी सच्चाई ही काफी है
किसी की नींद उड़ाने के लिए।

किसी को लगता है मैं टूट जाऊँगा,
किसी को लगता है मैं रुक जाऊँगा,
पर उन्हें क्या मालूम—
मैं उन लोगों में से हूँ
जो राख से भी उठकर तूफ़ान बन जाते हैं।

मैंने उन दलालों को बदलते देखा है,
चेहरे मुस्कुराते और दिल जलते देखा है,
पर एक बात समझ आ गई—
दुनिया आपकी सफलता पर ताली बजाती है,
और आपकी तकलीफ पर तंज कसती है।

तो मैंने ठान लिया—
अब ना किसी की सुनूँगा,
ना किसी से डरूँगा,
ना किसी की खुशी में जियूँगा
ना किसी के तानों से मरूँगा।

मैं बस मैं—
सीधी रीढ़ वाला,
तेज निगाह वाला,
और आग सी हिम्मत वाला।

जिस दिन मैंने अपनी चाल तेज़ की—
रुकना तो दूर,
लोग पीछे छूटने का इल्ज़ाम भी मुझ पर लगाएंगे।

मैं न दिखावा करता हूँ
न झूठी बातें बिकाऊ बनाता हूँ,
मेरी शख़्सियत कच्चे माल की नहीं—
खुद गढ़े हुए इस्पात की है।

और हाँ—
कौन क्या सोचता है,
कौन क्या बोलता है,
कौन साथ है, कौन नहीं—
इन चिंताओं ने मुझे कभी जलाया नहीं।

मैं आज भी, कल भी,
और आख़िरी सांस तक
यही रहूँगा—
अपने दम पर खड़ा हुआ,
बेपरवाह,
बेदर्दी से ईमानदार,
और सबसे अलग।

संपादक -

अरविन्द सिंह जादौन 

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