नर्सें बाहर तमाशा देखती रहीं, अंदर 9 मरीजों की मौत हो गयी, मरीज आग से मर रहे थे, लेकिन फायर स्प्रिंकलर तक नहीं था-कोविड अस्पताल में आग हादसे की आंखों देखी। - Ghatak Reporter

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Friday, April 23, 2021

नर्सें बाहर तमाशा देखती रहीं, अंदर 9 मरीजों की मौत हो गयी, मरीज आग से मर रहे थे, लेकिन फायर स्प्रिंकलर तक नहीं था-कोविड अस्पताल में आग हादसे की आंखों देखी।

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कोविड अस्पताल में आग हादसे की आंखों देखी...

नर्सें बाहर तमाशा देखती रहीं, अंदर 9 मरीजों की मौत हो गयी, मरीज आग से मर रहे थे, लेकिन फायर स्प्रिंकलर तक नहीं था।

नर्सें बाहर तमाशा देखती रहीं , अंदर 9 मरीजों की मौत हो गयी, मरीज आग से मर रहे थे, लेकिन फायर स्प्रिंकलर तक नहीं था-कोविड अस्पताल में आग हादसे की आंखों देखी

महाराष्ट्र के विरार वेस्ट में स्थित विजय वल्लभ हॉस्पिटल के सेकंड फ्लोर पर बने ICU में लगे AC में शुक्रवार तड़के करीब 3.30 बजे धमाका होता है। इससे निकलने वाली चिंगारी ICU में गिरती है और थोड़ी देर बाद पूरे वार्ड में आग फैल जाती है। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि आग लगने के दौरान ICU में न नर्स थी और न ही कोई डॉक्टर। जब तक उन्हें इसकी जानकारी हुई, पूरे वार्ड में धुंआ फैल गया था। हादसे के वक्त ICU में 15 मरीज वेंटिलेटर पर थे, जिनमें से 13 की मौत हो गई।
अविनाश ने आगे बताया, 'मुझे मेरे दोस्त ने रात सवा 3 बजे फोन कर हॉस्पिटल जाने के लिए कहा। मैं कुछ ही देर में यहां पहुंच गया और दौड़कर हॉस्पिटल के सेकंड फ्लोर पर बने ICU के बाहर पहुंचा। ICU का दरवाजा खुला था, लेकिन उसके अंदर से धुंआ निकल रहा था। मैंने अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन धुएं की वजह से तुरंत अंदर जाना संभव नहीं हो पाया।'

प्रत्यक्षदर्शी ने बताया- ICU में फायर स्प्रिंकलर तक नहीं था

एक चश्मदीद ने बताया कि ICU में एडमिट एक मरीज का 3 से 4 लाख तक का बिल बनता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिलता। यहां पर फायर सेफ्टी उपकरण भी नहीं थे। अगर ICU में फायर स्प्रिंकलर होता तो आग पर तुरंत काबू पा लिया जाता और इतनी बड़ी घटना नहीं होती।

नर्सें बाहर तमाशा देख रही थीं, अंदर 9 मरीजों की मौत हो चुकी थी

अविनाश ने बताया कि आग लगने के बाद ICU के बाहर सिर्फ 3 नर्सें मौजूद थीं और कोई भी डॉक्टर नहीं था। नर्सें खड़ी होकर तमाशा देख रही थीं। अविनाश आगे बताते हैं, 'कुछ देर बाद फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग बुझाना शुरू किया। 4 बजे के आसपास धुंआ थोड़ा कम हुआ तो मैं कुछ दूसरे लोगों के साथ सिर नीचे कर किसी तरह अंदर घुसा। अंदर जाकर देखा कि 9 लोग बेड पर दम तोड़ चुके थे और जो तड़प रहे थे, उन्हें किसी तरह हमने मिलकर बाहर निकाला। उनमें से भी कई ने 5 बजे के आसपास दम तोड़ दिया। जो बचे हैं उनकी भी हालत गंभीर बनी हुई है। उनका भी बचना मुश्किल लग रहा था।'

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