रायसेन/सिलवानी, यह स्वर्णिम अवसर मिला है जिसे भगवान की कृपा मानो - जगतगुरु स्वामी रामस्वरुपाचार्य। - Ghatak Reporter

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Saturday, December 18, 2021

रायसेन/सिलवानी, यह स्वर्णिम अवसर मिला है जिसे भगवान की कृपा मानो - जगतगुरु स्वामी रामस्वरुपाचार्य।

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यह स्वर्णिम अवसर मिला है जिसे भगवान की कृपा मानो - जगतगुरु स्वामी रामस्वरुपाचार्य।

  • श्रीराम कथा से पूर्व नगर में निकाली गई भव्य शोभा यात्रा, सैंकड़ो की संख्या में शामिल हुए श्रद्वालु।

रायसेन/सिलवानी, यह स्वर्णिम अवसर मिला है जिसे भगवान की कृपा मानो - जगतगुरु स्वामी रामस्वरुपाचार्य।

घातक रिपोर्टर, जसवंत साहू, रायसेन/सिलवानी।
सिलवानी। पंच दिवसीय श्रीराम कथा से पूर्व नगर में हिंदु उत्सव समिति के बेनर तले भव्य व विशाल कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्वालु शामिल हुए। दोपहर के समय नगर के प्राचीन श्रीराम मंदिर जमुनियापुरा से कलश यात्रा प्रारंभ की गई। कलश यात्रा में सबसे आगें महिलाए व बालिकाएं सिर पर कलश रखे हुए शामिल हुई। इसके बाद एक रथ में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता व हनुमान की वेषभूषा धारण किए हुए श्रद्वालु सवार थे। तत्पष्चात एक अन्य रथ में जगतगुरु स्वामी रामस्वरुपाचार्य महाराज सवार थे। इससे पीछे चल रहे रथ में बापोली वाले गुरुजी तथा अंत में रथ पर श्रीराम मंदिर के महत नागाराम दास महाराज, नरेश शास्त्री नगर खेरापति व अन्य सवार थे। स्थान-स्थान पर श्रद्वालुओं के द्वारा जगतगुरु स्वामी रामस्वरुपाचार्य महाराज, बापोली वाले गुरुजी, मंहत नागाराम दास महाराज, पंडित नरेश शास्त्री आदि का पूजन कर आरती उतारी जाकर आशीर्वाद लिया गया। कलश यात्रा में ड्रोन हेलीकाप्टर से कृतिम पुष्प वर्षा की जा रही थी। जबकि डीजे पर बज रहे भक्ति गीतो पर युवा नृत्य कर रहे थे। सिर पर कलश रखे महिलाए मंगल भजनो का गान कर कार्यक्रम को सार्थकता प्रदान कर रही थी। श्रीराम मंदिर से कथा स्थल हेलीपेड मैदान तक करीब 1 किलो मीटर लंबाई के मार्ग को पूर्ण करने में कलश यात्रा को करीब एक घंटे से अघिक का समय लगा। नगर में प्रथम बार जगतगुरु स्वामी रामस्वरुपाचार्य महाराज के मुखारविंद से श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम की सफलता को लेकर आयोजक समिति हिंदु उत्सव समिति के द्वारा करीब एक माह से घर-घर जाकर लोगो को कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण दिया जा रहा था।

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श्रद्धालुओं में भी कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखा गया। कलश यात्रा की सफलता वकाय्रक्रम में शामल होने के लिए सनातन व्यापार महासंघ के द्वारा सनातन समाज के व्यापरियो से आधा दिन तक अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रख कर कार्यक्रम में शामिल होने का आव्हाण किया गया था। जिसके चलते उक्त प्रतिष्ठान बंद देखे गए। रामकथा कार्यक्रम को लेकर कलश यात्रा मार्ग को भगवा ध्वज व झंडियो से सजाया गया। श्रीराम कथा के प्रथम दिन जगतगुरु स्वामी रामस्वरुपाचार्य ने कथा में पहुचें श्रद्वालुओं को अपनी मंगलमयी वाणी का रसास्वादन कराते हुए बताया कि क्षेत्र केे श्रद्वालुओं को स्वार्णिम अवसर मिला है। इस कार्यक्रम में शनिवार व मंगलवार मिले है। यानि दोनो ही वार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के अनंय भक्त हनुमानजी महाराज के वार है। अन्य कार्यक्रम में से दो दिन कम कर पांच दिन का समय सिलवानी के लिए दिया है। यह हनुमानजी महाराज की कृपा से ही संभव हो सका है। उन्होन बताया कि प्रत्येक सनातन परिवार में तुलसी दल व रमायण ग्रंथ होना चाहिए। लेकिन यदि किसी घर में यह दोनो ही नही है तो वह घर सनातन का नही हो सकता है।

रायसेन/सिलवानी, यह स्वर्णिम अवसर मिला है जिसे भगवान की कृपा मानो - जगतगुरु स्वामी रामस्वरुपाचार्य।

प्रत्येक घर में तुलसीदल व रामायण होना आवष्यक। उन्होने बताया कि आत्म शक्ति के समर्पण से ही आयोजन सफल होता है। यदि कार्य में आत्म शक्ति का अभाव हो जाता है तो सफलता संभव नही हो पाती है। किसी भी कार्य को करने के लिए आत्म शक्ति होना आवष्यक है। रित्र का निर्माण कैसे हो यह रामायण से सीख लेनी चाहिए। हनुमान जी जैसा चरित्र किसी का नही हो सकता और ना ही एैसा साधक  हो सकता है। जगतगुरु स्वामी रामस्वरुपाचार्य ने कहा कि जिस व्यक्ति के मन में संतो की सेवा करने की ललक होती है वह ही संतो की सेवा कर पाता है। एैसे लोगो पर संतो का हमेशा ही आशीर्वाद होता है। संतो की, गाय की, ब़ड़ो की सेवा करने का जीवन में संकल्प ले तभी जीवन का कल्याण हो सकता है। उन्होने सीख दी कि जब भी महापुरुषो का, अपनो से बड़ो का, माता-पिता का चरण स्पर्ष करने का अवसर मिले तो उस अवसर को जाया नही करना चाहिए। एैसे अवसर का लाभ उठाना चाहिए। यह अवसर सौभाग्य से ही मिलता है। कार्यक्रम को बापोली धाम वाले ब्रम्हचारी महाराज आदि ने भी संबोधित किया। मंच संचालन पंडित नरेश शास्त्री ने किया। कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में श्रद्वालु पहुचें।

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